बांग्लादेश में हमले के तीन दिन बाद हिंदू व्यापारी की मौत

बांग्लादेश में हमले के तीन दिन बाद हिंदू व्यापारी की मौत

ढाका/नयी दिल्ली, 3 जनवरी : बांग्लादेश में तीन दिन पहले बर्बर हमले के बाद आग के हवाले किए गए एक हिंदू व्यापारी की शनिवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। अल्पसंख्यक समुदाय के एक नेता ने यह जानकारी दी और कहा कि हाल के दिनों में हिंदू समुदाय पर हमलों की घटनाएं गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं।

बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के प्रवक्ता काजोल देबनाथ ने बताया कि मृतक की पहचान खोकोन चंद्र दास (50) के रूप में हुई है। उन्होंने कहा कि दिसंबर महीने से अब तक हिंदू समुदाय के पांच लोगों की हिंसक घटनाओं में मौत हो चुकी है और कट्टरपंथी समूह अल्पसंख्यक समुदायों को डराने-धमकाने की कोशिश कर रहे हैं।

देबनाथ के अनुसार, खोकोन चंद्र दास पर बुधवार रात शरीयतपुर जिले के केउरभंगा बाजार के पास उस समय हमला किया गया था, जब वह अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। “तीन दिनों तक जीवन के लिए संघर्ष करने के बाद आज सुबह दास का निधन हो गया,” उन्होंने कहा।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, दवा की दुकान और मोबाइल बैंकिंग का कारोबार करने वाले दास एक ऑटो-रिक्शा से यात्रा कर रहे थे, तभी हमलावरों ने वाहन को रोका। आरोप है कि हमलावरों ने उनकी बेरहमी से पिटाई की, धारदार हथियारों से हमला किया और बाद में उन पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी।

हमले से बचने की कोशिश में दास सड़क किनारे एक तालाब में कूद गए, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने शोर मचाया। पुलिस के अनुसार, हमलावर मौके से फरार हो गए। स्थानीय लोगों ने गंभीर रूप से घायल दास को शरीयतपुर सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां से उनकी हालत को देखते हुए उन्हें ढाका रेफर कर दिया गया था।

ढाका में इलाज कर रहे चिकित्सकों ने बताया था कि दास के शरीर पर कई गंभीर चोटें थीं, जिनमें पेट में गहरा घाव तथा चेहरे, सिर और हाथों पर जलने के गंभीर निशान शामिल थे।

काजोल देबनाथ ने कहा, “दिसंबर महीने में यह हिंदू समुदाय के किसी व्यक्ति की पांचवीं मौत है। इसी अवधि में हमने समुदाय पर सात हमलों की घटनाएं दर्ज की हैं।”

उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, “किसी व्यक्ति या उसके घर को जलाने के लिए पेट्रोल या बारूद का इस्तेमाल करना केवल आपराधिक कृत्य नहीं है, बल्कि यह एक अशुभ संकेत है। ऐसा प्रतीत होता है कि हम एक कट्टरपंथी संस्कृति के उभार के साक्षी बन रहे हैं।”

घटना के बाद से अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं और प्रशासन पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

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