बंगाल सरकार ने निर्वाचन आयोग से ‘फर्जी मतदाता’ मामले में प्राथमिकी आदेश वापस लेने का अनुरोध किया

कोलकाता, 17 जनवरी। पश्चिम बंगाल सरकार ने निर्वाचन आयोग (ईसी) से अनुरोध किया है कि वह मतदाता सूची में कथित “फर्जी मतदाता” मामलों में चार अधिकारियों—दो ईआरओ और दो एईआरओ—के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश को वापस ले। सरकार का तर्क है कि आपराधिक कार्रवाई “मामूली चूक के लिए बड़ी सजा” के समान होगी।

अधिकारी ने बताया कि निर्वाचन आयोग का निर्देश राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के माध्यम से दिया गया था। इसके बावजूद राज्य का गृह विभाग सीईओ को पत्र लिखकर आदेश रद्द करने का अनुरोध कर रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि संबंधित अधिकारी पहले ही निलंबन और विभागीय कार्रवाई का सामना कर चुके हैं और अब आपराधिक कानून का सहारा लेना अनुचित होगा।

यह विवाद मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत पूर्वी मेदिनीपुर जिले के मोयना और दक्षिण 24 परगना जिले के बरुईपुर पूर्व की मतदाता सूचियों में कथित फर्जी मतदाता शामिल होने से जुड़ा है। निर्वाचन आयोग ने ईआरओ देवोत्तम दत्ता चौधरी, मोयना के सहायक एईआरओ तथागत मंडल, बरुईपुर पूर्व के ईआरओ बिप्लब सरकार और एईआरओ सुदीप्त दास के निलंबन और प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। साथ ही संविदा डेटा एंट्री ऑपरेटर सुरजीत हलदर के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश था।

बंगाल सरकार ने महाधिवक्ता से कानूनी सलाह लेकर तर्क दिया कि कथित कदाचार आपराधिक अभियोजन के लिए पर्याप्त नहीं है और मामले को प्रशासनिक स्तर पर निपटाना उचित होगा। वर्तमान में चारों अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि डेटा एंट्री ऑपरेटर ने इस्तीफा दे दिया है। सीईओ कार्यालय ने राज्य का अनुरोध आयोग को भेजा है और आयोग उचित समय पर अंतिम निर्णय लेगा।

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