फॉर्म-7 के दुरुपयोग पर रोक लगे, स्वतंत्र जांच कराए निर्वाचन आयोग: कांग्रेस

नयी दिल्ली, 29 जनवरी । कांग्रेस ने 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग पर गंभीर चिंता जताते हुए बृहस्पतिवार को निर्वाचन आयोग से आग्रह किया कि ऐसे सभी संदिग्ध मामलों की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए।

पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी मांग की कि फॉर्म-7 से जुड़े सभी आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं।

गौरतलब है कि फॉर्म-7 मतदाता सूची में दर्ज किसी व्यक्ति के नाम पर आपत्ति दर्ज कराने या पहले से शामिल नाम को हटाने का अनुरोध करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला आधिकारिक आवेदन पत्र है।

वेणुगोपाल ने पत्र में कहा, “हम आयोग का ध्यान एक अत्यंत गंभीर और चिंताजनक विषय की ओर आकृष्ट करना चाहते हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण के अंतर्गत दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया के दौरान योग्य मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जा रहे हैं।”

उन्होंने दावा किया कि मीडिया रिपोर्टों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की जांच में ऐसे कई मामलों की पहचान हुई है, जिनमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े लोगों द्वारा निर्वाचन आयोग के दस्तावेज फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर पात्र मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची से हटवाने का प्रयास किया गया।

कांग्रेस नेता ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की कार्रवाइयों को नहीं रोका गया और निर्वाचन आयोग ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो इससे भाजपा को अनुचित चुनावी लाभ मिलेगा और लाखों मतदाता—विशेषकर पिछड़े, हाशिए पर रहने वाले समुदायों से जुड़े लोग—अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।

वेणुगोपाल ने यह भी रेखांकित किया कि दावे और आपत्तियों की अवधि में प्रमाण प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी फॉर्म-7 भरने वाले व्यक्ति की होती है तथा झूठी जानकारी देने पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत दंड का प्रावधान है। इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर जो हो रहा है, वह अत्यंत चौंकाने वाला और गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने आरोप लगाया, “फॉर्म-7 के ‘प्री-प्रिंटेड’ आवेदन बड़ी संख्या में किसी केंद्रीकृत प्रणाली के माध्यम से तैयार किए जा रहे हैं। इनका इस्तेमाल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यकों और 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। इन फॉर्म को संगठित तरीके से विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में बीएलओ को सौंपा जा रहा है।”

कांग्रेस नेता के अनुसार, इन फॉर्मों में कई मामलों में आपत्तिकर्ता की पहचान से जुड़ी आवश्यक जानकारी भी नहीं होती। उन्होंने यह भी दावा किया कि अनेक मामलों में जिन व्यक्तियों के नाम से फॉर्म-7 दाखिल किए गए, उन्होंने सार्वजनिक रूप से ऐसे किसी फॉर्म को भरने से इनकार किया है। उनके मुताबिक, राजस्थान और असम में इस प्रकार का दुरुपयोग विशेष रूप से सामने आया है।

वेणुगोपाल ने निर्वाचन आयोग से मांग की कि बिना वैध पहचान और प्रमाण वाले सभी संदिग्ध फॉर्म-7 की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए। साथ ही बीएलओ और ईआरओ को निर्देश दिए जाएं कि व्यक्तिगत सत्यापन के बिना किसी भी मतदाता का नाम सूची से न हटाया जाए। उन्होंने फॉर्म-7 के दुरुपयोग में शामिल सभी व्यक्तियों और संगठनों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की।

इसके अलावा, उन्होंने आयोग से आग्रह किया कि 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में फॉर्म-7 से संबंधित संपूर्ण आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं।

कांग्रेस नेता ने कहा, “मताधिकार लोकतंत्र की आत्मा है। किसी भी संगठित प्रयास के जरिए नागरिकों को इससे वंचित करना असंवैधानिक है। हम निर्वाचन आयोग से अपील करते हैं कि वह इस विषय को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए तत्काल आवश्यक कदम उठाए।”

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