नयी दिल्ली | 25 जनवरी – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को उम्मीद जताई कि देश के नागरिक प्रलोभन, पूर्वाग्रह और गलत सूचनाओं से दूर रहकर अपने विवेक के आधार पर मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिससे भारत की चुनावी प्रणाली और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने चुनावों में बड़ी संख्या में भागीदारी करने वाली महिलाओं की विशेष रूप से सराहना की।
दिल्ली में आयोजित 16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि मतदान का अधिकार अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन यह भी उतना ही आवश्यक है कि नागरिक अपने संवैधानिक कर्तव्यों को ध्यान में रखते हुए इसका प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि मतदान केवल एक राजनीतिक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया में नागरिकों के विश्वास और आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है।
राष्ट्रपति ने रेखांकित किया कि देश के सबसे बुजुर्ग मतदाता, दिव्यांग मतदाता और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी अपने मताधिकार का उपयोग कर लोकतंत्र को सशक्त बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जन-भागीदारी लोकतंत्र की भावना को जमीनी स्तर पर साकार करती है और निर्वाचन आयोग के प्रयासों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि “कोई भी मतदाता पीछे न छूट जाए।”
उन्होंने कहा कि बिना किसी भेदभाव के सभी वयस्क नागरिकों को प्राप्त मतदान का अधिकार, राजनीतिक और सामाजिक न्याय तथा समानता के संवैधानिक आदर्शों को ठोस रूप देता है। राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान में निहित “एक व्यक्ति, एक वोट” का सिद्धांत संविधान निर्माताओं के आम नागरिकों की बुद्धिमत्ता पर दृढ़ विश्वास का प्रतीक है।
गौरतलब है कि निर्वाचन आयोग के स्थापना दिवस 25 जनवरी को पिछले 16 वर्षों से राष्ट्रीय मतदाता दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को संविधान अपनाते समय निर्वाचन आयोग से संबंधित अनुच्छेद को तत्काल प्रभाव से लागू किया था। आयोग 25 जनवरी 1950 को अस्तित्व में आया, जबकि संविधान का शेष भाग 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि पिछले 75 वर्षों में भारत की चुनावी यात्रा संविधान में निहित मूल्यों को बनाए रखते हुए लोकतंत्र की ताकत, लचीलेपन और समावेशिता का प्रमाण रही है। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि जिम्मेदारी और जागरूकता के साथ मतदान करके नागरिक विश्वसनीय और समावेशी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में योगदान देते हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर नागरिकों से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा कि मतदाता होना केवल संवैधानिक विशेषाधिकार नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण कर्तव्य है, जो प्रत्येक नागरिक को भारत के भविष्य को आकार देने में अपनी आवाज उठाने का अधिकार देता है।
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि राष्ट्रीय मतदाता दिवस केवल एक वार्षिक आयोजन नहीं, बल्कि “भारत के लोकतंत्र की आत्मा के साथ संवाद” का अवसर है। उन्होंने “एक व्यक्ति, एक वोट—प्रत्येक वोट का एक मूल्य” सिद्धांत को डॉ. बी. आर. आंबेडकर की देन बताया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि विश्व के सभी लोकतंत्र यह मानते हैं कि स्वच्छ मतदाता सूची एक मजबूत लोकतंत्र की आधारशिला है। उन्होंने बताया कि संविधान और कानून के अनुसार केवल 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के भारतीय नागरिक, जो सामान्यतः किसी निर्वाचन क्षेत्र में रहते हैं, मतदाता सूची में पंजीकरण के पात्र हैं। इसी उद्देश्य से निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू किया है।
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दावा किया कि हाल के दिनों में निर्वाचन आयोग जैसी संस्थाओं पर दबाव बढ़ा है और उनकी स्वतंत्रता की रक्षा करना आवश्यक है, ताकि लोकतंत्र न केवल जीवित रहे, बल्कि फले-फूले। उन्होंने ‘वोट चोरी’ और अनियोजित एसआईआर के जरिए मतदान अधिकार को कमजोर करने के आरोप लगाते हुए कहा कि भारत की जनता स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त चुनावों की हकदार है।
