प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर राष्ट्रपति और संविधान का अपमान करने का आरोप लगाया

लोकसभा में हुए हंगामे का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

नयी दिल्ली, 5 फरवरी । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कांग्रेस पर लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस के दौरान हंगामा कर राष्ट्रपति का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्य विपक्षी दल पर आदिवासियों, दलितों और पूर्वोत्तर के लोगों का भी अपमान करने का आरोप लगाया।

राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने संविधान और संवैधानिक पदों की गरिमा को ठेस पहुंचाई है।

लोकसभा में हुए हंगामे का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा,
“कांग्रेस ने राष्ट्रपति का अपमान किया। यह शर्मनाक है। कल लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा नहीं हो सकी। यह राष्ट्रपति पद का अपमान है। ऐसे लोगों को संविधान के बारे में बात करने का कोई अधिकार नहीं है।”

उन्होंने कहा कि लोकसभा में जो घटना हुई वह अत्यंत दुखद है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “आपने आदिवासियों, महिलाओं और भारत के सर्वोच्च पद का अपमान किया है। हम आपकी निराशा और हताशा समझ सकते हैं, लेकिन यह लोकतंत्र के मंदिर में किया गया।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि हंगामे के दौरान लोकसभा की कार्यवाही असम के एक सांसद की अध्यक्षता में चल रही थी और उन पर कागज फेंके गए।
उन्होंने कहा, “क्या यह पूर्वोत्तर का अपमान नहीं है? क्या यह असम के लोगों का अपमान नहीं है?”

उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले भी ऐसी ही स्थिति तब पैदा की गई थी, जब आंध्र प्रदेश के एक दलित परिवार से आने वाले सांसद पीठासीन थे।
प्रधानमंत्री ने कहा, “वे अपना काम कर रहे थे, लेकिन उनका अपमान किया गया। क्या इसलिए कि वह दलित परिवार से आते हैं?”

प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर असम के प्रसिद्ध गायक, संगीतकार और कवि भूपेन हजारिका का भी अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा,
“यह हमारा सौभाग्य था कि हमने उन्हें भारत रत्न दिया, लेकिन विपक्ष ने इस पर भी आपत्ति जताई।”

प्रधानमंत्री ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को लेकर राहुल गांधी की ‘गद्दार’ टिप्पणी की निंदा करते हुए इसे पूरे सिख समुदाय का अपमान बताया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के एक नेता द्वारा सदन के एक सदस्य को ‘गद्दार’ कहना अहंकार की पराकाष्ठा है और यह सिखों के प्रति कांग्रेस की मानसिकता को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री ने मनोनीत सांसद सदानंदन मास्टर का भी उल्लेख किया, जिन्होंने अपने पहले भाषण के दौरान सदन में अपने कृत्रिम पैर प्रदर्शित किए थे।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दुश्मनी के कारण जवानी में सदानंदन मास्टर के पैर काट दिए गए, लेकिन उनके मूल्य इतने ऊंचे हैं कि वह कभी गलत भाषा का प्रयोग नहीं करते।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,
“वैचारिक मतभेदों के कारण एक शिक्षक और युवा के पैर काट दिए गए और इसके लिए जिम्मेदार लोग आज भी पछतावा नहीं दिखाते। इसके लिए इंडी गठबंधन जिम्मेदार है।”

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