पान मसाला पर जीएसटी के साथ उपकर से बनेगा सख्त कर ढांचा, कर चोरी पर लगेगी प्रभावी लगाम: सूत्र

नयी दिल्ली, एक जनवरी । पान मसाला के विनिर्माण पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के साथ मशीन और उत्पादन क्षमता आधारित उपकर लगाए जाने से कर चोरी रोकने में बड़ी मदद मिलेगी और राजस्व की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। सरकारी सूत्रों ने कहा है कि इस नई व्यवस्था से एक ऐसा व्यापक और पारदर्शी कर ढांचा तैयार होगा, जिसमें मूल्य और उत्पादन क्षमता से जुड़े आंकड़ों का मिलान कर अनियमितताओं की पहचान आसान हो जाएगी।

वित्त मंत्रालय ने एक फरवरी से पान मसाला के उत्पादन पर स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर लगाने की अधिसूचना जारी की है। यह उपकर पहले से लागू अधिकतम 40 प्रतिशत जीएसटी दर के अतिरिक्त होगा, हालांकि कुल कर भार मौजूदा स्तर 88 प्रतिशत पर ही बना रहेगा। सरकार का कहना है कि कर दर बढ़ाने के बजाय कर संग्रह प्रणाली को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाना इसका मुख्य उद्देश्य है।

फिलहाल पान मसाला पर 28 प्रतिशत जीएसटी के साथ क्षतिपूर्ति उपकर लगाया जाता है। लेकिन एक फरवरी से व्यवस्था में बदलाव के तहत जीएसटी को पान मसाला के खुदरा बिक्री मूल्य यानी आरएसपी के आधार पर लगाया जाएगा, जबकि उपकर विनिर्माता की स्थापित उत्पादन क्षमता के आधार पर वसूला जाएगा। सूत्रों के अनुसार, इससे सरकार के पास कर आकलन के लिए दो अलग-अलग लेकिन परस्पर जुड़े डेटा सेट उपलब्ध होंगे।

सूत्रों ने बताया कि आरएसपी आधारित जीएसटी से यह स्पष्ट होगा कि कितना माल और किस कीमत पर बाजार में बेचा गया, जबकि मशीन और क्षमता आधारित उपकर से यह जानकारी मिलेगी कि उपलब्ध मशीनों के आधार पर अधिकतम कितना उत्पादन संभव था। इन दोनों आंकड़ों का मिलान करने से पान मसाला और धुआंरहित तंबाकू जैसे क्षेत्रों में कर चोरी की गुंजाइश काफी हद तक कम हो जाएगी, जहां अतीत में अघोषित उत्पादन, मूल्यांकन विवाद और समुचित जानकारी न देने की शिकायतें रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक, यदि मशीनों की उत्पादन क्षमता के अनुपात में जीएसटी रिटर्न में घोषित बिक्री असामान्य रूप से कम पाई जाती है, तो यह तुरंत जोखिम का संकेत देगा। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज, औचक निरीक्षण, चार्टर्ड इंजीनियर द्वारा प्रमाणित मशीन मानकों और जोखिम-आधारित विश्लेषण के जरिए मामले की गहन जांच की जा सकेगी।

सरकार का मानना है कि इस दोहरे डेटा विश्लेषण से फर्जी बिलिंग, कम बिक्री दिखाने और अघोषित उत्पादन जैसी प्रवृत्तियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा। साथ ही, इससे ईमानदार करदाताओं पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना कर संग्रह बढ़ाने में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर, यह नई व्यवस्था पान मसाला उद्योग में पारदर्शिता बढ़ाने और कर अनुपालन को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

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