नयी दिल्ली, 3 जनवरी : कांग्रेस ने शनिवार को घोषणा की कि वह महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को बहाल कराने और इसके स्थान पर लाए गए ‘विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम’ के विरोध में अगले सप्ताह से करीब 45 दिनों का देशव्यापी अभियान ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ शुरू करेगी। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि नए कानून को न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि यह अभियान 10 जनवरी 2026 से 25 फरवरी 2026 तक चलेगा। इसके तहत ग्राम स्तर से लेकर जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक व्यापक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अभियान के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में चार बड़ी क्षेत्रीय रैलियां भी होंगी।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मनरेगा के स्थान पर लाया गया ‘विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम’ ग्रामीण रोजगार की गारंटी नहीं, बल्कि “योजना के केंद्रीकरण और विनाश भारत” की गारंटी देता है। उन्होंने कहा कि यह संग्राम दिल्ली-केंद्रित नहीं, बल्कि पंचायत, प्रखंड और जिला स्तर पर केंद्रित होगा।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि पार्टी की तीन स्पष्ट मांगें हैं—
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‘जी राम जी कानून’ को वापस लिया जाए,
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मनरेगा को अधिकार आधारित कानून के रूप में बहाल किया जाए,
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काम के अधिकार और पंचायतों के अधिकार को पुनः स्थापित किया जाए।
खरगे ने कहा, “मनरेगा कोई चैरिटी नहीं, बल्कि कानूनी गारंटी है। इसने करोड़ों गरीबों को उनके गांवों में काम दिया, पलायन घटाया, ग्रामीण मजदूरी बढ़ाई और महिलाओं की आर्थिक गरिमा को मजबूत किया। ‘जी राम जी’ कानून इसी अधिकार को खत्म करने के लिए बनाया गया है।”
वेणुगोपाल ने दावा किया कि नया कानून इस तरह गढ़ा गया है कि मनरेगा को धीरे-धीरे समाप्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि कोविड और अन्य संकटों के दौरान मनरेगा एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित हुआ था। उनके अनुसार, नए कानून में कार्यदिवस 100 से बढ़ाकर 125 करने का दावा भ्रामक है, क्योंकि केंद्र सरकार का वित्तीय योगदान 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है।
जयराम रमेश ने कहा कि ‘वीबी–जी राम जी अधिनियम’ की एकमात्र गारंटी योजना का केंद्रीकरण है। उन्होंने दावा किया कि यह संग्राम उसी तरह सफल होगा, जैसे तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन, जिसके बाद सरकार को कानून वापस लेने पड़े थे।
अभियान का विस्तृत कार्यक्रम:
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8 जनवरी: प्रदेश कांग्रेस कमेटी स्तर पर तैयारी बैठकें
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10 जनवरी: जिला स्तरीय प्रेस वार्ता
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11 जनवरी: एक दिवसीय उपवास और प्रतीकात्मक विरोध
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12–29 जनवरी: ग्राम पंचायत स्तर पर चौपाल, जनसंपर्क, नुक्कड़ सभाएं और पर्चा वितरण
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30 जनवरी: वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरना
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31 जनवरी–6 फरवरी: जिला स्तरीय ‘मनरेगा बचाओ’ धरना और ज्ञापन
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7–15 फरवरी: राज्य स्तर पर विधानसभाओं का घेराव
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16–25 फरवरी: अभियान के समापन के रूप में एआईसीसी की चार प्रमुख क्षेत्रीय रैलियां
गौरतलब है कि संसद ने विपक्ष के हंगामे के बीच 18 दिसंबर 2025 को ‘विकसित भारत–जी राम जी विधेयक’ को मंजूरी दी थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्वीकृति के बाद यह अधिनियम बन चुका है और यह 20 वर्ष पुराने मनरेगा कानून का स्थान लेगा।
