नई दिल्ली/पटना, 12 अक्टूबर 2025 बिहार विधानसभा चुनावों की सरगर्मी के बीच रविवार को बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होने जा रही है। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा और अन्य वरिष्ठ नेता हिस्सा लेंगे। बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी बिहार चुनाव के लिए भाजपा उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देना और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में सीटों के बंटवारे पर अंतिम मुहर लगाना है।
शनिवार को भी बीजेपी नेतृत्व और एनडीए सहयोगी दलों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। पार्टी के बिहार इकाई प्रमुख दिलीप जायसवाल ने संकेत दिया कि सीटों के बंटवारे की औपचारिक घोषणा रविवार या सोमवार सुबह 11 बजे तक कर दी जाएगी। हालांकि, यह घोषणा पटना में होगी या दिल्ली में, इस पर अंतिम निर्णय एनडीए नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, बीजेपी और जनता दल (यूनाइटेड) [जेडी(यू)] के बीच सीट बंटवारे का फॉर्मूला लगभग तय हो गया है। संभावना है कि जेडी(यू) 101-102 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि भाजपा उससे एक सीट कम यानी 100-101 सीटों पर। अन्य सहयोगी दलों — हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के जीतन राम मांझी और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के उपेंद्र कुशवाहा — के साथ बातचीत अभी जारी है।
शनिवार को बीजेपी अध्यक्ष नड्डा के आवास पर चली मैराथन बैठक में बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान, राजनीतिक मामलों के प्रभारी विनोद तावड़े और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी उपस्थित रहे। सम्राट चौधरी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि “सभी दलों के बीच सकारात्मक संवाद हुआ है और सभी सहयोगी संतुष्ट हैं। किसी को कोई नाराजगी नहीं है।”
वहीं, लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान को उनकी पार्टी के केंद्रीय संसदीय बोर्ड ने सभी निर्णय लेने का अधिकार दे दिया है। माना जा रहा है कि चिराग पासवान एनडीए के साथ बने रहेंगे, लेकिन उनकी सीटों की संख्या पर अभी सहमति नहीं बनी है।
हम (एस) के महासचिव राजेश पांडे ने भी स्पष्ट किया कि उन्होंने बीजेपी नेतृत्व के सामने अपने विचार रखे हैं और सभी विकल्प खुले हैं। उन्होंने कहा, “राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता।”
अब सबकी निगाहें रविवार को होने वाली केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक पर टिकी हैं, जहां सीट शेयरिंग की गुत्थी सुलझने की पूरी उम्मीद है। अगर सब कुछ योजना के अनुसार चला, तो एनडीए बिहार चुनावों में एकजुट होकर उतरने का संकेत दे सकता है।
