उत्तराखंड के पछवादून सहित कई क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय बदलाव की जांच के आदेश, सरकार ने जताई चिंता

देहरादून, 16 अक्टूबर। उत्तराखंड सरकार ने राज्य के पछवादून क्षेत्र सहित अन्य इलाकों में जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन और पुलिस को व्यापक जांच के आदेश दिए हैं। सरकार ने यह कदम आधार कार्ड, परिवार रजिस्टर और मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेजों में कथित फर्जीवाड़े और गड़बड़ियों की शिकायतों के मद्देनजर उठाया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते ने बताया कि जनसंख्या में असामान्य बदलाव दर्ज किए गए हैं, जिनकी जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि संबंधित जिलों के प्रशासन और पुलिस को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) और प्रमाणपत्र जारी करने वाली संस्थाओं की गतिविधियों पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

पछवादून क्षेत्र के ग्रामीण भी जनसांख्यिकीय बदलाव को महसूस कर रहे हैं। ढकरानी गांव के 83 वर्षीय निवासी श्यामलाल ने कहा, “पहले मुस्लिम आबादी कम थी, लेकिन अब काफी बढ़ गई है।” गांव के पूर्व प्रधान मौसम सिंह के अनुसार, 2010 के बाद इस क्षेत्र में तेजी से आबादी में इजाफा हुआ और नहर के किनारे खाली जमीनों पर अतिक्रमण कर निर्माण किए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस समय के जनप्रतिनिधियों ने वैध दस्तावेज बनवाने में मदद की।

स्थानीय दुकानदार और अन्य निवासियों ने भी बताया कि पिछले 10–15 वर्षों में मुस्लिम आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और अब कई नए लोग क्षेत्र में बस गए हैं, जिनकी पृष्ठभूमि स्थानीय लोगों को ज्ञात नहीं है। वहीं, मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने रिश्तेदारों को यहां बसाया है क्योंकि अन्य स्थानों पर वे परेशान थे।

यह मामला अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे ‘देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान पर खतरा’ बताया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि कई जगहों पर बहुसंख्यक आबादी में 40–60 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है।

वहीं, कांग्रेस ने इस मुद्दे पर भाजपा को आड़े हाथों लिया। पार्टी नेता सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि यह राजनीतिक रूप से उछाला गया मुद्दा है और यदि कोई जनसांख्यिकीय बदलाव हुआ है, तो जिम्मेदारी भाजपा सरकार की ही बनती है। उन्होंने कहा, “भारत के किसी भी नागरिक को कहीं भी बसने का संवैधानिक अधिकार है।”

सरकार ने संकेत दिए हैं कि जांच पूरी होने के बाद इस पर नीति बनाकर उचित कार्रवाई की जाएगी।

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