अयोध्या राम मंदिर की तर्ज पर कानूनी प्रक्रिया से भोजशाला में बनेगा वाग्देवी मंदिर: विहिप

धार (मध्यप्रदेश), 23 जनवरी । विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने शुक्रवार को कहा कि अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण की तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत धार के भोजशाला परिसर में वर्ष 2034 तक वाग्देवी (देवी सरस्वती) का भव्य मंदिर बनाया जाएगा।

वसंत पंचमी के अवसर पर भोजशाला में वाग्देवी के दर्शन से पूर्व आयोजित एक विशाल सभा को संबोधित करते हुए कुमार ने कहा कि भोजशाला में पहले से प्राण-प्रतिष्ठित वाग्देवी की मूर्ति फिलहाल लंदन के एक संग्रहालय में रखी हुई है, जिसे भारत वापस लाया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इसके लिए अदालत में लंबित मुकदमे को जीतकर मंदिर का स्वरूप सरस्वती मां की प्रतिष्ठा के अनुरूप बहाल किया जाएगा।

भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष 11वीं सदी के इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है और इससे संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

विहिप नेता ने दावा किया कि भोजशाला में वाग्देवी का मंदिर वर्ष 1034 में निर्मित हुआ था और इस निर्माण तथा मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा को 992 वर्ष पूरे हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2034 में इस ऐतिहासिक धरोहर के 1,000 वर्ष पूर्ण होंगे।

कुमार ने कहा, “हमें संकल्प लेना होगा कि हम न्यायालय की प्रक्रिया पूरी करेंगे, वाग्देवी की मूर्ति को लंदन से वापस लाएंगे और जैसे अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हुआ, उसी भव्यता से 2034 में भोजशाला में वाग्देवी की प्राण-प्रतिष्ठा करेंगे।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि भोजशाला परिसर में पहले मंदिर के साथ एक गुरुकुल भी था, जहां बड़ी संख्या में छात्र वेद, पुराण और शास्त्रों का अध्ययन करते थे। उन्होंने कहा कि यदि यहां दोबारा मंदिर का निर्माण होता है, तो देश के मध्य में स्थित धार एक बार फिर विद्या, ज्ञान और अध्ययन का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

सभा में उपस्थित साधु-संतों ने भी भोजशाला को हिंदुओं का धार्मिक स्थल बताते हुए सरकार से मांग की कि लंदन के संग्रहालय में रखी वाग्देवी की मूर्ति भारत लाई जाए, उसे भोजशाला परिसर में स्थापित किया जाए और उज्जैन के ‘श्री महाकाल लोक गलियारे’ की तर्ज पर धार में ‘वाग्देवी गलियारे’ का निर्माण किया जाए।

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