अयोध्या दीपोत्सव 2025: 26 लाख दीपों की रोशनी में नहाई रामनगरी, बना विश्व रिकॉर्ड

अयोध्या (उत्तर प्रदेश), 19 अक्टूबर  विशेष प्रतिनिधि – अयोध्या में रविवार को इतिहास रच दिया गया, जब दीपोत्सव के पावन अवसर पर 26,17,215 दीपों की एक साथ प्रज्वलन से संपूर्ण रामनगरी दीपमय हो उठी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नौवें भव्य दीपोत्सव का उद्घाटन भगवान श्रीराम और सीता के प्रतीकात्मक राज्याभिषेक के साथ किया। इस आयोजन ने न केवल आध्यात्मिक उल्लास का संचार किया, बल्कि दो विश्व रिकॉर्ड भी अपने नाम किए।

दीपों की महाज्योति बनी विश्व रिकॉर्ड का साक्षी

उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन विभाग, अयोध्या जिला प्रशासन और डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के संयुक्त प्रयास से एक साथ 26 लाख से अधिक दीप जलाकर ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में नाम दर्ज किया गया। साथ ही, सरयू तट पर एक साथ 2,128 लोगों द्वारा की गई आरती भी एक नया कीर्तिमान बन गई। गिनीज बुक के अधिकारियों ने ड्रोन के जरिए दीयों की गिनती कर इस ऐतिहासिक उपलब्धि की पुष्टि की और मुख्यमंत्री को प्रमाण पत्र सौंपा।

“दीप नहीं, विश्वास की विजय का प्रतीक हैं” – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम कथा पार्क में आयोजित दीपोत्सव समारोह को संबोधित करते हुए कहा, “आज अयोध्या में जलते दीप केवल रोशनी नहीं हैं, ये 500 वर्षों के अंधकार पर विश्वास की विजय के प्रतीक हैं। हमारे पूर्वजों ने लंबे संघर्ष और अपमान झेला, जब प्रभु श्रीराम तंबू में विराजमान थे। आज वह भव्य और दिव्य मंदिर में विराजे हैं।”

उन्होंने कहा कि 2017 में दीपोत्सव की शुरुआत केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं थी, बल्कि यह दुनिया को यह दिखाने की कोशिश थी कि दीपों की असली परंपरा क्या होती है।

विपक्ष पर तीखा प्रहार

मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा, “कांग्रेस ने राम को मिथक बताया था, समाजवादी पार्टी ने राम भक्तों पर गोलियां चलवाईं। आज वही दल राम मंदिर के ‘प्राण प्रतिष्ठा’ जैसे समारोहों के निमंत्रण को ठुकरा देते हैं। वे बाबर की कब्र पर सजदा करते हैं, लेकिन रामलला को नमन करने में संकोच करते हैं।”

उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी कुछ राजनीतिक दल अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति पर चल रहे हैं और समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं।

“त्रेता युग की अनुभूति” — संतों की प्रतिक्रिया

राम कथा पार्क में हुए प्रतीकात्मक राज्याभिषेक में उपस्थित संत समाज ने मुख्यमंत्री की सराहना करते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ ने वह कर दिखाया है जो सदियों तक असंभव प्रतीत होता था।

पूर्व सांसद रामविलास वेदांती महाराज ने कहा, “पहले लोग सैफई महोत्सव कराते थे, योगी ने अयोध्या में दीपोत्सव की परंपरा शुरू कर हिंदू समाज का मस्तक ऊंचा किया है। आज हर सनातन धर्मावलंबी गौरव का अनुभव कर रहा है।”

जगतगुरु राघवाचार्य महाराज ने कहा, “पहले के मुख्यमंत्री अयोध्या का नाम लेने से भी कतराते थे, लेकिन योगी जी हर महीने अयोध्या आकर संतों से संवाद करते हैं। उन्होंने विक्रमादित्य की परंपरा को पुनर्जीवित किया है।”

“अब अयोध्या अंधकार नहीं, प्रकाश की राजधानी” – योगी

योगी आदित्यनाथ ने कहा, “जहां कभी गोलियां चलती थीं, आज वहां दीप जलते हैं। अब अयोध्या में हर वर्ष 6 से 10 करोड़ श्रद्धालु आते हैं। पहले कुछ हजार लोगों के आने से अव्यवस्था दिखती थी, आज पूरी व्यवस्था सजग है।”

उन्होंने कहा कि अयोध्या अब “विकास और विरासत का अद्भुत संगम” बन चुकी है और उत्तर प्रदेश अब पहचान के संकट से मुक्त है। दीपोत्सव का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि “रामराज्य की अवधारणा” को साकार करना है, जिसमें हर जरूरतमंद तक सुविधाएं पहुंचे।

दीपोत्सव 2025 केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन परंपरा, राष्ट्र गौरव और जनभावनाओं का अद्वितीय संगम बन गया है। योगी सरकार की पहल ने न केवल एक नए अध्याय की शुरुआत की है, बल्कि अयोध्या को वैश्विक धार्मिक पर्यटन का केंद्र भी बना दिया है।

26 लाख दीपों की यह रोशनी आज केवल सरयू किनारे नहीं, बल्कि पूरे भारतवर्ष में रामराज्य की संभावना को रौशन कर रही है।

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