नयी दिल्ली, तीन फरवरी । भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते को लेकर विपक्षी दलों ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। विपक्ष का आरोप है कि प्रधानमंत्री ने दबाव में आकर यह समझौता किया है, जिसमें देश के करोड़ों किसानों के हितों के साथ विश्वासघात किया गया है। विपक्षी दलों ने समझौते के पूरे विवरण सार्वजनिक करने की भी मांग की है।
भारत और अमेरिका एक ऐसे व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं, जिसके तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर लगने वाले शुल्क को कुल 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। हालांकि, इस समझौते को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारी दबाव में हैं। उन्होंने कहा, “जो व्यापार समझौता चार महीने से रुका हुआ था, उसमें कुछ भी बदले बिना कल शाम उस पर हस्ताक्षर कर दिए गए। इसके पीछे क्या कारण है, यह मैं भी जानता हूं और प्रधानमंत्री भी जानते हैं।”
राहुल गांधी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री की बनाई गई छवि खतरे में है और वह ‘कंप्रोमाइज्ड’ हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस समझौते में किसानों की मेहनत और खून-पसीने को बेच दिया गया है और सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि देश के हितों से भी समझौता किया गया है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में राहुल गांधी द्वारा उठाए गए मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्यापार समझौते की घोषणा करने का अनुरोध किया। रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि ट्रंप की पोस्ट से यह स्पष्ट होता है कि यह घोषणा प्रधानमंत्री के अनुरोध पर तत्काल प्रभाव से की गई।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने समझौते के पीछे गुप्त एजेंडे की आशंका जताई। उन्होंने कहा कि अमेरिका कभी भी ऐसा समझौता नहीं करता, जिससे उसे नुकसान हो। ऐसे में इस समझौते में जरूर कोई छिपा हुआ उद्देश्य होगा।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत ने आरोप लगाया कि यह व्यापार समझौता उद्योगपति गौतम अदाणी को अमेरिका में मुकदमों से बचाने के लिए किया गया है।
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी समझौते को किसानों के साथ विश्वासघात बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने किसानों की “पीठ और पेट में छुरा घोंपा है” और पार्टी इस समझौते का सड़क से लेकर संसद तक विरोध करेगी।
द्रमुक सांसद कनिमोई ने समझौते को लेकर पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संसद का सत्र चल रहा है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है, जबकि अमेरिका की ओर से पहले घोषणा कर दी गई। उन्होंने विशेष रूप से यह जानने की जरूरत बताई कि क्या भारतीय कृषि और किसान इस समझौते में सुरक्षित हैं।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पोलित ब्यूरो ने भी इस समझौते को असंतुलित बताते हुए कहा कि इसमें भारत के हितों की अनदेखी की गई है। पार्टी ने मांग की कि सरकार व्यापार समझौते का पूरा विवरण संसद और जनता के सामने रखे, ताकि इस पर व्यापक चर्चा हो सके और भारतीय उद्योग, कृषि तथा कामकाजी लोगों के हितों की रक्षा की जा सके।
