लखनऊ, 05 जून 2026 (RNN)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं। गोरक्षपीठ के महंत से देश के सबसे प्रभावशाली मुख्यमंत्रियों में शामिल होने तक का उनका सफर भारतीय राजनीति में एक अनूठी कहानी माना जाता है। आध्यात्म, संगठन और राजनीति के समन्वय से उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है।
मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के पंचूर गांव में 5 जून 1972 को जन्मे योगी आदित्यनाथ का बचपन का नाम अजय सिंह बिष्ट था। सात भाई-बहनों वाले परिवार में जन्मे योगी ने गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित विषय में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 1994 में मात्र 22 वर्ष की आयु में उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर गोरखनाथ मठ में दीक्षा ग्रहण की और अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ बन गए।
26 वर्ष की आयु में बने सबसे युवा सांसद
गोरक्षपीठ के तत्कालीन महंत महंत अवेद्यनाथ ने योगी आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। इसके बाद वर्ष 1998 में उन्होंने गोरखपुर से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया। 26 वर्ष की आयु में सांसद बनकर उन्होंने उस समय देश के सबसे युवा सांसदों में स्थान बनाया।
योगी आदित्यनाथ ने 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 में लगातार पांच बार लोकसभा चुनाव जीतकर पूर्वांचल की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ स्थापित की। सांसद के रूप में उनकी पहचान हिंदुत्व, जनसरोकार और संगठनात्मक सक्रियता के लिए बनी।
महंत और जननेता की दोहरी भूमिका
गोरखनाथ मंदिर और उससे जुड़े शैक्षणिक, चिकित्सीय एवं सामाजिक संस्थानों के संचालन की जिम्मेदारी संभालते हुए योगी आदित्यनाथ ने जनसेवा को अपनी प्राथमिकता बनाया। जनता दरबार, गोसेवा, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े कार्यों के कारण उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई।
उनकी दिनचर्या आज भी अनुशासन और योग साधना के लिए जानी जाती है। सुबह योग और पूजा-पाठ से शुरू होने वाला उनका दिन देर रात तक प्रशासनिक और सामाजिक गतिविधियों में व्यतीत होता है।
2017 में बने मुख्यमंत्री
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत के बाद 19 मार्च 2017 को योगी आदित्यनाथ ने पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके नेतृत्व में प्रदेश में कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचा, एक्सप्रेस-वे, निवेश और औद्योगिक विकास जैसे मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया।
वर्ष 2022 में भाजपा ने दोबारा बहुमत हासिल किया और योगी आदित्यनाथ लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने वाले राज्य के चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए। गोरखपुर शहर विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर उन्होंने पहली बार विधानसभा का चुनाव भी जीता।
राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ता प्रभाव
मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक प्रभाव उत्तर प्रदेश की सीमाओं से बाहर भी बढ़ा है। विभिन्न राज्यों के चुनावों में भाजपा के स्टार प्रचारक के रूप में उनकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण रही है। पार्टी के चुनावी अभियानों में उनके भाषण और जनसभाएं विशेष आकर्षण का केंद्र रहती हैं।
विकास और प्रशासनिक सख्ती की पहचान
अपने कार्यकाल में योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था, निवेश, धार्मिक पर्यटन, बुनियादी ढांचे और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को प्रमुखता दी। अयोध्या, काशी और मथुरा जैसे धार्मिक स्थलों के विकास के साथ-साथ औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन को भी गति देने का प्रयास किया गया।
54वें जन्मदिन पर योगी आदित्यनाथ न केवल उत्तर प्रदेश की राजनीति का प्रमुख चेहरा हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में उनकी गिनती होती है। महंत से मुख्यमंत्री तक का उनका सफर भारतीय राजनीति और सामाजिक जीवन में एक विशिष्ट उदाहरण के रूप में देखा जाता है।
