तब्बू को नेशनल अवॉर्ड मिलने के सालों बाद सोनाली कुलकर्णी ने किया खुलासा, बोलीं- मुझे बहुत जलन होती थी…

तब्बू से जलन, फिर उनकी सबसे बड़ी फैन बन गईं सोनाली कुलकर्णी; सालों बाद नेशनल अवॉर्ड को लेकर किया खुलासा

मुंबई। फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों के बीच प्रतिस्पर्धा होना आम बात है, लेकिन कई बार यही प्रतिस्पर्धा प्रेरणा में भी बदल जाती है। अभिनेत्री सोनाली कुलकर्णी ने वर्षों बाद एक ऐसा ही दिलचस्प किस्सा साझा किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि जब तब्बू को फिल्म माचिस के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था, तब उन्हें बेहद जलन हुई थी। हालांकि, फिल्म देखने के बाद उनका नजरिया पूरी तरह बदल गया और उन्होंने तब्बू की अभिनय प्रतिभा को खुले दिल से स्वीकार किया।

‘माचिस’ के लिए तब्बू को मिला था पहला नेशनल अवॉर्ड

साल 1996 में निर्देशक गुलजार की फिल्म माचिस रिलीज हुई थी। आतंकवाद की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा। फिल्म में तब्बू के दमदार अभिनय ने उन्हें उस दौर की बेहतरीन अभिनेत्रियों की कतार में खड़ा कर दिया और इसी प्रदर्शन के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।

उसी वर्ष सोनाली कुलकर्णी की फिल्म भी राष्ट्रीय पुरस्कारों की दौड़ में शामिल थी। उन्हें उम्मीद थी कि इस बार सम्मान उनके हिस्से आएगा, लेकिन अंतिम फैसला तब्बू के पक्ष में गया।

“मुझे बहुत जलन हुई थी”

सोनाली कुलकर्णी ने हालिया बातचीत में कहा कि जब उन्हें पता चला कि तब्बू को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है, तो वह काफी निराश और नाराज हो गई थीं।

उन्होंने बताया कि उनकी कई फिल्में लगातार राष्ट्रीय पुरस्कारों के अंतिम दौर तक पहुंचती थीं, लेकिन हर बार आखिरी समय में पुरस्कार किसी और को मिल जाता था। ऐसे में इस बार भी खुद को पीछे पाकर उन्हें गहरा झटका लगा।

सोनाली के मुताबिक, “मुझे बहुत गुस्सा आया था और तब्बू से जलन भी होने लगी थी। नेशनल अवॉर्ड हर कलाकार का सपना होता है, इसलिए उस हार को स्वीकार करना मेरे लिए आसान नहीं था।”

फिल्म देखने के बाद बदल गई सोच

सोनाली ने बताया कि उन्होंने खुद को समझाने की कोशिश की, लेकिन मन शांत नहीं हुआ। आखिरकार उन्होंने फैसला किया कि वह माचिस देखेंगी और समझेंगी कि आखिर तब्बू को यह सम्मान क्यों मिला।

फिल्म देखने के बाद उनकी पूरी सोच बदल गई।

उन्होंने कहा कि तब्बू का अभिनय इतना प्रभावशाली था कि उन्हें महसूस हुआ कि यह सम्मान पूरी तरह से योग्य कलाकार को मिला है। इसके बाद उन्होंने तब्बू की कई और फिल्में देखीं और उनकी अभिनय क्षमता की प्रशंसक बन गईं।

नेशनल अवॉर्ड की अहमियत सबसे अलग

सोनाली कुलकर्णी का मानना है कि किसी भी कलाकार के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार का महत्व बेहद खास होता है। व्यावसायिक सफलता और दूसरे पुरस्कार अपनी जगह हैं, लेकिन नेशनल अवॉर्ड कलाकार के अभिनय की सबसे बड़ी पहचान माना जाता है। यही वजह थी कि उस समय पुरस्कार न मिल पाने का दर्द उन्हें लंबे समय तक महसूस होता रहा।

प्रतिस्पर्धा से सम्मान तक का सफर

सोनाली कुलकर्णी का यह खुलासा बताता है कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा कलाकारों के बीच स्वाभाविक है। शुरुआती निराशा और ईर्ष्या के बावजूद उन्होंने बाद में तब्बू के अभिनय को स्वीकार किया और उनकी खुलकर सराहना की। यह अनुभव इस बात का भी उदाहरण है कि सच्ची कला अंततः अपने सबसे बड़े आलोचक का भी सम्मान हासिल कर लेती है।

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