2027 चुनाव से पहले कांग्रेस का बड़ा दांव: यूपी प्रभारी बदले, अविनाश पांडेय की जगह राजेंद्र पाल गौतम को मिली कमान

लखनऊ, 26 जून 2026। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटी कांग्रेस ने बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय को उनके पद से हटा दिया है। पार्टी नेतृत्व ने उनकी जगह वरिष्ठ नेता और दलित चेहरे के रूप में पहचान रखने वाले राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश का नया प्रभारी नियुक्त किया है। माना जा रहा है कि कांग्रेस का यह फैसला आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सामाजिक और जातीय समीकरणों को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में लंबे समय से प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और प्रभारी अविनाश पांडेय दोनों ही सवर्ण वर्ग से थे। ऐसे में पार्टी के भीतर यह महसूस किया जा रहा था कि संगठन की शीर्ष जिम्मेदारियों में सामाजिक संतुलन की कमी दिखाई दे रही है। लोकसभा चुनाव 2024 में संविधान बचाओ और पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) की राजनीति को मिले सकारात्मक संकेतों के बाद कांग्रेस अब उसी सामाजिक समीकरण को संगठन में भी लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

दलित चेहरे पर दांव लगाकर कांग्रेस ने बदली रणनीति, ‘पीडीए’ और जातीय समीकरणों को साधने की तैयारी; राहुल गांधी की सामाजिक न्याय की लाइन पर संगठन में बड़ा बदलाव

राहुल गांधी लगातार देशभर में जातीय जनगणना और “जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” का मुद्दा प्रमुखता से उठा रहे हैं। उत्तर प्रदेश जैसे राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण राज्य में पार्टी अब अपने संगठन को भी इसी विचारधारा के अनुरूप ढालना चाहती है। इसी रणनीति के तहत दलित समुदाय से आने वाले राजेंद्र पाल गौतम को प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

दलित वोट बैंक पर कांग्रेस की नजर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में दलित मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रही है। समाजवादी पार्टी की पीडीए राजनीति और बहुजन समाज पार्टी के पारंपरिक दलित वोट बैंक के बीच कांग्रेस अपनी नई राजनीतिक जमीन तलाशना चाहती है। ऐसे में राजेंद्र पाल गौतम की नियुक्ति केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी मानी जा रही है।

ढाई साल बाद बदली जिम्मेदारी

अविनाश पांडेय को 23 दिसंबर 2023 को लोकसभा चुनाव 2024 से पहले उत्तर प्रदेश का प्रभारी महासचिव बनाया गया था। उन्होंने प्रियंका गांधी वाड्रा की जगह यह जिम्मेदारी संभाली थी। उनके कार्यकाल में कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन विधानसभा चुनाव 2027 की नई रणनीति के तहत अब संगठन में बदलाव का फैसला लिया गया है।

सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश

कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि केवल चुनावी भाषणों में सामाजिक न्याय की बात करने से आगे बढ़कर संगठन में भी उसी सोच को प्रतिबिंबित करना आवश्यक है। उत्तर प्रदेश में प्रभारी के रूप में दलित नेता की नियुक्ति को इसी दिशा में उठाया गया अहम कदम माना जा रहा है।

2027 की रणनीति पर फोकस

कांग्रेस अब उत्तर प्रदेश में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के बीच अपनी पैठ बढ़ाने तथा सामाजिक न्याय के मुद्दों को केंद्र में रखकर चुनावी रणनीति तैयार करने में जुट गई है। राजेंद्र पाल गौतम के नेतृत्व में पार्टी संगठन के पुनर्गठन और नई टीम के गठन की प्रक्रिया भी तेज होने की संभावना है।

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