लखनऊ, 03 मई 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश की जनगणना निदेशक एवं मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी शीतल वर्मा ने स्पष्ट किया है कि आगामी जनगणना के दौरान जाति आधारित गणना भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह जनगणना व्यापक स्तर पर हर नागरिक तक पहुंचने वाला एक महत्वपूर्ण अभियान है।
दो चरणों में होगा कार्य
शीतल वर्मा ने बताया कि पहले चरण में घरों की गणना और घरेलू संपत्ति से जुड़ी जानकारी एकत्र की जा रही है। दूसरे चरण, जो फरवरी 2027 में निर्धारित है, में प्रत्येक व्यक्ति की विस्तृत जानकारी ली जाएगी, जिसमें साक्षरता, व्यवसाय और अन्य व्यक्तिगत विशेषताएं शामिल होंगी। इसी चरण में जाति गणना भी की जाएगी।
सार्वभौमिक अभियान
उन्होंने कहा कि जनगणना एक ऐसा अभियान है, जिसमें हर व्यक्ति को शामिल किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति किसी क्षेत्र में सामान्य रूप से निवास करता है, तो उसे उसी क्षेत्र की जनसंख्या का हिस्सा माना जाएगा, जब तक कि उसे राजनयिक छूट प्राप्त न हो या वह किसी अन्य देश का नागरिक न हो।
प्रशासनिक सीमाएं रहेंगी स्थिर
निदेशक ने बताया कि 31 मार्च 2027 तक किसी भी नए राजस्व गांव, तहसील, प्रशासनिक ब्लॉक या राज्य का गठन नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एकत्रित आंकड़ों को राजस्व गांव और वार्ड स्तर पर सटीक रूप से प्रकाशित किया जा सके।
डेटा रहेगा पूरी तरह गोपनीय
मृत्युंजय कुमार नारायण ने भी नागरिकों से अपील की है कि वे गणना कर्मियों को सही जानकारी दें। उन्होंने आश्वस्त किया कि व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और इसका उपयोग न तो किसी कानूनी साक्ष्य के रूप में होगा और न ही किसी योजना के लाभ के लिए किया जाएगा।
केवल सांख्यिकीय उपयोग
उन्होंने कहा कि जनगणना से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग केवल सांख्यिकीय विश्लेषण और नीति निर्माण के लिए किया जाएगा। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत भी व्यक्तिगत जानकारी किसी संस्था—चाहे सरकारी हो या निजी—के साथ साझा नहीं की जा सकती।
ऐतिहासिक पहल
यह जनगणना स्वतंत्रता के बाद आठवीं और 1872 से शुरू हुई श्रृंखला की 16वीं जनगणना होगी। उल्लेखनीय है कि स्वतंत्रता के बाद अब तक की जनगणनाओं में जाति को शामिल नहीं किया गया था, जबकि 1881 से 1931 के बीच जाति आधारित गणना की जाती थी।
पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडलीय समिति ने आगामी जनगणना में जाति गणना को शामिल करने का निर्णय लिया था।
डिजिटल सुरक्षा के कड़े प्रबंध
अधिकारियों के अनुसार, जनगणना से जुड़े आंकड़ों की सुरक्षा के लिए कड़े डिजिटल प्रबंध किए गए हैं, ताकि नागरिकों की जानकारी सुरक्षित और संरक्षित रह सके।
यह पहल देश की सामाजिक संरचना को बेहतर ढंग से समझने और भविष्य की नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
