मुंबई। अखिलेश यादव ने कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने हाशिये पर पड़े समुदायों को संगठित और सशक्त बनाने के लिए भीमराव रामजी आंबेडकर के विचारों और दृष्टिकोण का अनुसरण किया।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को मुंबई में कांशीराम की जयंती के अवसर पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही। उन्होंने कहा कि कांशीराम का सामाजिक न्याय और समानता की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान रहा है और उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया जाना चाहिए।
अखिलेश यादव ने कहा, “हमारा मानना है कि कांशीराम को भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए। उन्होंने बहुजन समाज को संगठित करने और उसके अधिकारों के लिए संघर्ष करने का जो काम किया, वह ऐतिहासिक है।”
उन्होंने कहा कि कांशीराम ने सामाजिक न्याय और समानता के जिस संघर्ष की शुरुआत की, वह डॉ. आंबेडकर के विचारों से प्रेरित था और आज भी इन आदर्शों को आगे बढ़ाने की जरूरत है।
सपा प्रमुख ने याद किया कि एक समय मुलायम सिंह यादव और कांशीराम ने उत्तर प्रदेश में संयुक्त सरकार बनाई थी, जिससे बहुजन समाज पार्टी को भी मजबूती मिली।
उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2019 में उन्होंने बसपा के साथ गठबंधन इस उद्देश्य से किया था कि मायावती को प्रधानमंत्री पद की संभावित उम्मीदवार के रूप में समर्थन दिया जा सके, हालांकि यह गठबंधन सफल नहीं हो पाया।
इससे पहले अखिलेश यादव ने “क्रिएटिव इकोनॉमी” विषय पर आयोजित एक संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शासन में रचनात्मक सोच के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि रचनात्मकता केवल कला और संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे प्रशासनिक निर्णय भी इसमें शामिल हैं जो लोगों के जीवन को बेहतर बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि जो निर्णय समाज में सकारात्मकता, समानता और मानवता को बढ़ावा दें, वही वास्तविक रचनात्मकता है। अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए अखिलेश ने कहा कि छोटे-छोटे प्रशासनिक सुधार भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।
सपा प्रमुख ने यह भी कहा कि यदि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 जीतती है, तो राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं और विनिर्माण ढांचे को मजबूत करना उनकी प्राथमिकता होगी।
