जूनोटिक रोगों की रोकथाम को मजबूत करेगा राज्यव्यापी प्रशिक्षण, यूपी में तैयार होंगे 150 मास्टर ट्रेनर्स

लखनऊ, 09 जुलाई। उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग ने राज्य में जूनोटिक (पशुजन्य) एवं प्राथमिकता वाले पशु रोगों की रोकथाम, निगरानी और नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से पशु चिकित्सकों के लिए दो दिवसीय राज्य स्तरीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (ToT) कार्यक्रम का शुभारंभ किया। 9 और 10 जुलाई तक चलने वाला यह प्रशिक्षण लखनऊ के होटल गोल्डन ट्यूलिप में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम को GHS-RISE परियोजना के अंतर्गत Jhpiego का तकनीकी सहयोग प्राप्त है।

कार्यक्रम का उद्घाटन पशुपालन विभाग के विशेष सचिव देवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने किया। उन्होंने कहा कि जूनोटिक रोगों की समय पर पहचान, निगरानी और रिपोर्टिंग को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने संभावित (Probable) एवं संदिग्ध (Suspected) मामलों की शीघ्र रिपोर्टिंग पर विशेष बल देते हुए कहा कि प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स अपने-अपने जनपदों में अन्य पशु चिकित्सकों एवं पैरा-वेटरिनरी कर्मियों को प्रशिक्षण देंगे, जिससे पूरे प्रदेश में रोग नियंत्रण तंत्र और अधिक प्रभावी होगा।

36 जिलों के चिकित्सक हुए शामिल

प्रशिक्षण के पहले चरण में प्रदेश के 36 जिलों से दो-दो सरकारी पशु चिकित्सक भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य उनकी तकनीकी क्षमता को विकसित करना है, ताकि वे पशुजन्य एवं अन्य प्राथमिकता वाले रोगों की शीघ्र पहचान, प्रारंभिक निदान, निगरानी, रिपोर्टिंग, रोकथाम और नियंत्रण बेहतर तरीके से कर सकें।

75 जिलों के लिए तैयार होंगे 150 मास्टर ट्रेनर्स

विभाग के अनुसार, राज्य के शेष 39 जिलों के सरकारी पशु चिकित्सकों के लिए 16 और 17 जुलाई को दूसरा राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। दोनों चरणों के माध्यम से उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के लिए कुल 150 मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जाएंगे, जो आगे जिला स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेंगे।

पशु चिकित्सकों के लिए दो दिवसीय राज्य स्तरीय टीओटी कार्यक्रम शुरू, 75 जिलों में मजबूत होगी रोग निगरानी और रिपोर्टिंग व्यवस्था
पशु चिकित्सकों के लिए दो दिवसीय राज्य स्तरीय टीओटी कार्यक्रम शुरू, 75 जिलों में मजबूत होगी रोग निगरानी और रिपोर्टिंग व्यवस्था

इन प्रमुख रोगों पर दिया जा रहा प्रशिक्षण

प्रशिक्षण के दौरान आईवीआरआई बरेली, पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय कुमारगंज (अयोध्या) तथा अन्य विशेषज्ञ संस्थानों के विषय विशेषज्ञ प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसमें निम्नलिखित प्रमुख रोगों पर विस्तृत जानकारी दी जा रही है—

  • हाई पैथोजेनिक एवियन इन्फ्लुएंजा (HPAI)
  • लेप्टोस्पायरोसिस
  • जापानी इंसेफेलाइटिस
  • बोवाइन ट्यूबरकुलोसिस
  • रेबीज
  • क्रीमियन-कांगो हेमोरेजिक फीवर (CCHF)
  • एन्थ्रेक्स
  • स्क्रब टाइफस
  • ग्लैंडर्स
  • लम्पी स्किन डिजीज
  • ब्रूसेलोसिस
  • साल्मोनेलोसिस
  • डर्मेटोफाइटोसिस

इसके अलावा रोगों के प्रसार के कारण, लक्षण, संदिग्ध एवं पुष्ट मामलों की पहचान, रोग निगरानी एवं रिपोर्टिंग प्रणाली, प्रयोगशाला जांच, जैव सुरक्षा (Biosafety) तथा नमूनों के सुरक्षित संग्रह, पैकेजिंग और परिवहन की वैज्ञानिक प्रक्रिया पर भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

वन हेल्थ दृष्टिकोण को मिलेगा बल

कार्यक्रम में निदेशक (प्रशासन एवं विकास) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, निदेशक डॉ. संगीता तिवारी, संयुक्त निदेशक (रोग नियंत्रण) डॉ. विवेकानन्द गंगवार, झपाइगो के स्टेट लीड डॉ. संजय त्रिपाठी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विषय विशेषज्ञ और विभिन्न जिलों से आए सरकारी पशु चिकित्सक उपस्थित रहे।

पशुपालन विभाग के अनुसार, यह पहल ‘वन हेल्थ (One Health)’ दृष्टिकोण को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे राज्य में जूनोटिक एवं अन्य प्राथमिकता वाले पशु रोगों की समय पर पहचान, प्रभावी निगरानी, त्वरित रिपोर्टिंग और प्रकोप की स्थिति में बेहतर नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सकेगा।

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