सनातन को मिटाने का प्रयास करने वाले स्वयं मिट्टी में मिल गए : सीएम योगी
लखनऊ/वाराणसी, 11 मई 2026 (यूएनएस)। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन संस्कृति भारत की आत्मा और चेतना में बसती है, इसलिए इसे कभी पराजित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इतिहास में कई विदेशी आक्रांताओं ने सनातन परंपरा और आध्यात्मिक विरासत को मिटाने का प्रयास किया, लेकिन वे स्वयं इतिहास के पन्नों में विलीन हो गए।
मुख्यमंत्री सोमवार को वाराणसी में आयोजित ‘सोमनाथ संकल्प महोत्सव’ में आनंदीबेन पटेल के साथ शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन काशी विश्वनाथ धाम परिसर स्थित त्र्यंबकेश्वर बहुउद्देशीय हॉल में किया गया। इस दौरान अतिथियों ने सोमनाथ मंदिर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम का सजीव प्रसारण देखा, जिसमें नरेंद्र मोदी द्वारा विशेष महापूजा, कुंभाभिषेक, ध्वजारोहण और पुष्पवृष्टि की गई।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मोहम्मद गोरी, महमूद गजनवी और औरंगजेब जैसे आक्रांताओं ने भारत की सांस्कृतिक पहचान को नष्ट करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि औरंगजेब ने बाबा विश्वनाथ के प्राचीन मंदिर को ध्वस्त कर गुलामी का ढांचा खड़ा किया, लेकिन वह भारत की आत्मा को नहीं तोड़ पाया। “सनातन केवल मंदिरों की दीवारों में नहीं, बल्कि भारत की चेतना में बसता है,” उन्होंने कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम और सोमनाथ मंदिर भारत की सांस्कृतिक चेतना और स्वाभिमान के अमर प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि काशी ने जहां सनातन की आध्यात्मिक धारा को अक्षुण्ण बनाए रखा, वहीं सोमनाथ ने भारतीय स्वाभिमान और पुनर्जागरण की लौ को प्रज्ज्वलित रखा है।
सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” की संकल्पना साकार हो रही है। उन्होंने राम मंदिर, महाकाल लोक और काशी विश्वनाथ धाम के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के प्राचीन तीर्थस्थल आज अपने वैभव के साथ नई पहचान बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर की पुनर्प्रतिष्ठा का संकल्प लिया था और तमाम विरोधों के बावजूद उसे पूरा किया। वहीं तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद भी सरकारी विरोध के बावजूद पुनर्प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए थे।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि आज भी कुछ शक्तियां भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के पुनर्जागरण को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने कहा कि यही लोग पहले सोमनाथ मंदिर की पुनर्प्रतिष्ठा और बाद में राम मंदिर निर्माण में बाधाएं खड़ी करते रहे।
इस अवसर पर प्रदेश सरकार के कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और धर्माचार्य भी मौजूद रहे।
