भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए हमेशा तैयार है रूस: राजदूत अलीपोव

नई दिल्ली, 5 मार्च । भारत में रूस के राजदूत Denis Alipov ने बृहस्पतिवार को कहा कि रूस हमेशा भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने के लिए तैयार रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच उनका यह बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजदूत अलीपोव ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि रूस और भारत के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग मजबूत रहा है और भविष्य में भी रूस भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “हम हमेशा से भारत को कच्चा तेल उपलब्ध कराने के लिए तैयार रहे हैं।”

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। क्षेत्रीय तनाव के बीच Strait of Hormuz के अवरुद्ध होने की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित यह संकरा समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और एलएनजी के परिवहन का प्रमुख रास्ता माना जाता है।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर काफी हद तक निर्भर है। देश अपनी कच्चे तेल की कुल आवश्यकता का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है, जबकि प्राकृतिक गैस की करीब आधी मांग भी विदेशों से पूरी होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पश्चिम एशिया में लंबे समय तक अस्थिरता बनी रहती है तो इसका असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।

इस बीच हाल के सप्ताहों में रूस से भारत के कच्चे तेल के आयात में गिरावट भी देखी गई है। पिछले महीने अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने भारत के साथ एक व्यापार समझौते की घोषणा करते हुए दावा किया था कि भारत रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदने पर सहमत हो गया है।

इसके साथ ही अमेरिका ने एक कार्यकारी आदेश के तहत भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क को भी वापस ले लिया था। यह शुल्क अगस्त में भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण लगाया गया था। अमेरिकी प्रशासन ने अपने आदेश में कहा था कि वह इस बात की निगरानी करेगा कि भारत सीधे या परोक्ष रूप से रूस से तेल खरीद फिर से शुरू करता है या नहीं।

हालांकि भारत सरकार का रुख स्पष्ट रहा है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों से तेल खरीदेगी। सरकार का कहना है कि ऊर्जा खरीद से जुड़े निर्णयों में राष्ट्रीय हित और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता सबसे महत्वपूर्ण कारक होंगे।

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