मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव लाने का नोटिस बृहस्पतिवार को दे सकता है विपक्ष

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार

नई दिल्ली, 11 मार्च । विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) के पद से हटाने के प्रस्ताव से जुड़ा नोटिस बृहस्पतिवार को संसद के दोनों सदनों में सौंप सकते हैं। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

घटनाक्रम से अवगत एक वरिष्ठ सांसद ने बताया कि प्रस्ताव के लिए आवश्यक हस्ताक्षर जुटा लिए गए हैं और नोटिस जल्द ही संसद में दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह नोटिस लोकसभा और राज्यसभा दोनों में प्रस्तुत किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, बुधवार शाम तक लोकसभा में दिए जाने वाले नोटिस पर लगभग 120 सांसदों ने हस्ताक्षर कर दिए थे, जबकि उच्च सदन में दिए जाने वाले नोटिस पर करीब 60 सांसदों के हस्ताक्षर हो चुके थे। नियमों के अनुसार, लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर वाले नोटिस की आवश्यकता होती है।

बताया जा रहा है कि इस नोटिस पर इंडिया गठबंधन के सभी घटक दलों के सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। यह पहली बार होगा जब किसी मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने के लिए इस तरह का नोटिस दिया जा रहा है।

विपक्षी दलों ने कई मौकों पर सीईसी पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की मदद करने का आरोप लगाया है। विशेष रूप से मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष पिछले कुछ महीनों से उन पर निशाना साधता रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य सत्तारूढ़ दल को फायदा पहुंचाना है।

कानून के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसी प्रक्रिया के तहत पद से हटाया जा सकता है, जिस प्रक्रिया से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है। वहीं अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की अनुशंसा के बिना पद से नहीं हटाया जा सकता।

न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत यदि किसी सदन में पद से हटाने का प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है, तो उस सदन के अध्यक्ष या सभापति तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन करते हैं। इस समिति में प्रधान न्यायाधीश या सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता शामिल होते हैं।

समिति की कार्यवाही अदालती प्रक्रिया की तरह होती है, जिसमें गवाहों से जिरह की जाती है और आरोपित व्यक्ति को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता है। समिति की रिपोर्ट आने के बाद उसे सदन में पेश किया जाता है, जिसके बाद पद से हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होती है। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त को अपना बचाव करने का पूरा अधिकार होता है।

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