लखनऊ, 1 मई 2026 (यूएनएस)। महिला आरक्षण अधिनियम को लेकर उत्तर प्रदेश विधानसभा में बुलाए गए विशेष सत्र पर कांग्रेस ने सरकार की मंशा और तैयारी दोनों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने स्पष्ट कहा कि इतने अहम मुद्दे पर महज कुछ घंटों की चर्चा पर्याप्त नहीं है और सत्र की अवधि बढ़ाई जानी चाहिए।
“पांच घंटे की चर्चा नाकाफी”
आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि महिला आरक्षण केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी—नारी शक्ति—के अधिकारों और उनकी राजनीतिक भागीदारी से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में इस पर जल्दबाजी करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ होगा।
उन्होंने मांग की कि सरकार पूरे दिन या उससे अधिक समय देकर इस विषय पर गंभीर और व्यापक चर्चा सुनिश्चित करे।
सरकार की मंशा पर सवाल
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे पर उतनी गंभीर नहीं दिख रही, जितनी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त बहस और विचार-विमर्श के इस तरह के महत्वपूर्ण निर्णय लेना उचित नहीं होगा।
हालांकि, कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि वह महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन इस पर विस्तृत चर्चा जरूरी है।
सदन में भी दिखी तकरार
इससे पहले सदन की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने भी इस मुद्दे को केंद्र सरकार का विषय बताते हुए विधानसभा में चर्चा पर आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण संशोधन विधेयक संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए राज्य विधानसभा में इस पर चर्चा नहीं होनी चाहिए।
सरकार का जवाब
संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि महिला सशक्तीकरण के मुद्दे पर सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश और देश की महिलाओं के सशक्तीकरण को लेकर पूरी तरह गंभीर है और इसी उद्देश्य से विशेष सत्र बुलाया गया है।
विपक्ष का आरोप—गुमराह कर रही सरकार
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सरकार के प्रस्ताव का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर जनता को गुमराह करना चाहती है और राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उछाल रही है।
महिला आरक्षण को लेकर यूपी विधानसभा के विशेष सत्र से पहले और उसके दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी है। जहां कांग्रेस विस्तृत चर्चा के लिए समय बढ़ाने की मांग कर रही है, वहीं सरकार इसे महिला सशक्तीकरण का महत्वपूर्ण कदम बता रही है। इससे स्पष्ट है कि यह मुद्दा आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में केंद्र में बना रहेगा।
