लखनऊ, 27 फरवरी 2026। लखनऊ में होली पर्व के अवसर पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए राज्यव्यापी विशेष विपणन अभियान प्रारम्भ किया गया है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि महिला स्वावलम्बन और सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से संचालित इस अभियान के तहत समूहों की महिलाएं नॉन-फार्म गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी कर रही हैं। वे हर्बल गुलाल और अबीर के साथ-साथ पापड़, चिप्स, मिठाइयाँ, अगरबत्ती, पिचकारी, टी-शर्ट प्रिंटिंग और हस्तशिल्प उत्पादों का निर्माण कर रही हैं। यह पहल महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर उद्यमी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अभियान की विशेषता प्राकृतिक संसाधनों से तैयार हर्बल गुलाल है, जिसे पलास के फूल, चुकंदर, गेंदे के फूल और पालक के रस से बनाया जा रहा है। यह रंग पूर्णतः केमिकल-फ्री, त्वचा के लिए सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल है। इसके माध्यम से समाज में “स्वस्थ होली, सुरक्षित होली” का संदेश भी दिया जा रहा है।
राज्य सरकार के निर्देशानुसार सभी जनपदों में विकास भवन, कलेक्ट्रेट, तहसील और अन्य शासकीय परिसरों में स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री काउंटर स्थापित किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन और नगर निकायों के सहयोग से संस्थागत खरीद को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध हो सके।
अभियान के अंतर्गत समूहों के उत्पादों को ई-सरस सहित प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड कराने की व्यवस्था की जा रही है, जिससे ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और बाजार मिल सके। बिक्री और ऑर्डर से संबंधित आंकड़ों की नियमित निगरानी के लिए डिजिटल प्रणाली भी लागू की गई है।
मिशन निदेशक दीपा रंजन ने कहा कि होली जैसे प्रमुख पर्व पर स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि यह पहल “वोकल फॉर लोकल” की भावना को सुदृढ़ करते हुए ग्रामीण उद्यमिता को नई दिशा दे रही है।
यह अभियान स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को “लखपति दीदी” लक्ष्य से जोड़ते हुए आय वृद्धि, सम्मान और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ठोस कदम के रूप में देखा जा रहा है। ग्रामीण महिलाएं अब त्योहारों के रंगों के साथ आर्थिक समृद्धि और सामाजिक सशक्तिकरण की नई पहचान गढ़ रही हैं।
