लखनऊ, 24 अप्रैल 2026 (RNN)। नगर निगम लखनऊ में गुरुवार को आयोजित विशेष सदन राजनीतिक टकराव की भेंट चढ़ गया। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर हुई बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर नोकझोंक हुई, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित रही।
जैसे ही महापौर सुषमा खर्कवाल ने अपना संबोधन शुरू किया, विपक्षी पार्षदों ने हंगामा शुरू कर दिया। समाजवादी पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पार्षदों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि नगर निगम का मंच स्थानीय मुद्दों के लिए है, न कि राष्ट्रीय राजनीतिक विषयों के लिए। उन्होंने बैठक की वैधता पर भी सवाल उठाए।
हंगामा बढ़ने पर समाजवादी पार्टी के सभी 22 पार्षद सदन का बहिष्कार कर बाहर चले गए, जबकि कांग्रेस पार्षदों ने विरोध जारी रखा। कांग्रेस पार्षद मुकेश सिंह चौहान और ममता चौधरी ने नगर निगम मुख्यालय में ही महापौर की गाड़ी के पास धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि जनता से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज कर राजनीतिक एजेंडा थोपने की कोशिश की जा रही है।
वहीं सत्ता पक्ष ने भी आक्रामक रुख अपनाया। भाजपा पार्षदों ने महापौर के समर्थन में नारे लगाए और विपक्ष पर तीखे आरोप लगाए। महिला पार्षद नेहा सिंह ने हालिया घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब शहर की महापौर ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग की।
भाजपा पार्षद गौरी सांवरिया ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे हर बड़े फैसले का विरोध करते रहे हैं और महिला आरक्षण को देश के सशक्तिकरण से जोड़ा। वहीं पार्षद रेखा सिंह ने शेरो-शायरी के माध्यम से महिला आरक्षण के समर्थन में अपनी बात रखी।
हालांकि, कुछ आपत्तिजनक नारों ने माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया। सदन में कई भाजपा महिला पार्षद तख्तियां लेकर पहुंचीं, जिन पर विपक्ष के खिलाफ तीखे नारे लिखे थे। इस दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी का दौर चलता रहा।
सबसे अहम बात यह रही कि इस पूरे हंगामे के बीच शहर की मूल समस्याएं—पानी, सफाई, सीवर और यातायात जैसे मुद्दे—चर्चा से पूरी तरह गायब रहे। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच जनहित के मुद्दे एक बार फिर हाशिये पर चले गए।
