विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत होने पर ‘बंगाल से घुसपैठियों को बाहर निकालेंगे’ : अमित शाह

मथुरापुर (पश्चिम बंगाल), 2 मार्च । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि राज्य में अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया जाएगा और यदि भारतीय जनता पार्टी 2026 के विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत से सत्ता में आती है, तो “घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें राज्य से बाहर निकाला जाएगा।” दक्षिण 24 परगना जिले में पार्टी की ‘परिवर्तन यात्रा’ को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था और सीमा सुरक्षा को प्रमुख चुनावी मुद्दा बताया।

शाह का यह दौरा संशोधित मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद हुआ, जिसमें विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत लाखों नाम हटाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल को “घुसपैठियों का स्वर्ग” बना दिया है और अवैध अप्रवासन को रोकने में विफल रही है। उनके अनुसार सीमावर्ती राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना केंद्र और राज्य दोनों की जिम्मेदारी है, लेकिन वर्तमान राज्य सरकार इस मोर्चे पर कमजोर साबित हुई है।

उन्होंने कहा कि फिलहाल मतदाता सूची से “अवैध रूप से शामिल नाम” हटाए जा रहे हैं, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद व्यापक स्तर पर पहचान और निष्कासन की प्रक्रिया चलाई जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पड़ोसी देशों से उत्पीड़न के कारण आए “हिंदू शरणार्थियों” की नागरिकता सुरक्षित रहेगी और उन्हें किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

राजनीतिक हमला तेज करते हुए शाह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सीमा सुरक्षा और प्रशासनिक नियंत्रण में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि राज्य में भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए “मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति” जरूरी है, जो केवल भाजपा दे सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि वर्तमान सरकार दोबारा सत्ता में आती है तो राज्य की बागडोर “वास्तविक नेतृत्व” के बजाय अन्य हाथों में जा सकती है, इशारा अभिषेक बनर्जी की ओर था।

एसआईआर अभियान के आंकड़ों का हवाला देते हुए शाह ने कहा कि मतदाता सूची में व्यापक बदलाव हुए हैं और कई मामलों की पात्रता की जांच जारी है। उनके अनुसार पारदर्शी मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है।

आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की राजनीति में घुसपैठ, नागरिकता और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दे केंद्र में आते दिख रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में इन विषयों पर बयानबाजी और तेज हो सकती है, जबकि मतदाता विकास, सुरक्षा और प्रशासनिक स्थिरता के आधार पर अपना निर्णय देंगे।

Related Post

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *