कर्णप्रयाग विवाद की चिंगारी से नगरासू गुरुद्वारे तक पहुंचा तनाव, 27 घंटे बाद वार्ता से सुलझा गतिरोध

रुद्रप्रयाग, 22 जून (यूएनएस)। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद स्थित नगरासू गुरुद्वारे में शनिवार शाम शुरू हुआ निहंगों का हाई-वोल्टेज गतिरोध करीब 27 घंटे बाद प्रशासन और निहंग प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता के बाद शांत हो गया। हालांकि इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था, खुफिया तंत्र की सक्रियता और हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह तक सातों निहंग तीर्थयात्री सामान्य श्रद्धालुओं की तरह गुरुद्वारे में रह रहे थे और सेवा कार्यों में भी भाग ले रहे थे। लेकिन शाम करीब चार बजे अचानक सात निहंग गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल और छत पर चढ़ गए तथा अपने दो साथियों को भी साथ ले गए। इसके बाद उन्होंने प्रवेश मार्गों को अवरुद्ध कर दिया और कर्णप्रयाग हिंसा प्रकरण में गिरफ्तार निहंगों की रिहाई की मांग पर अड़ गए।

प्रत्यक्षदर्शियों और गुरुद्वारा प्रबंधन के अनुसार, निहंगों ने छत पर ईंट-पत्थर और अन्य वस्तुएं एकत्र कर ली थीं। आरोप है कि उन्होंने सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए, पेयजल आपूर्ति बाधित कर दी तथा गुरुद्वारे की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। स्थिति को देखते हुए पुलिस, आईटीबीपी, एटीएस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे परिसर को घेर लिया।

गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के प्रबंधक बाबा बेहंत सिंह ने बताया कि निहंग अपने साथियों की रिहाई की मांग को लेकर अड़े हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि दो लोगों को बंधक बनाया गया था। देर रात एक व्यक्ति को छोड़ दिया गया, जबकि सेवादार नवतेज सिंह को बाद में वार्ता के बाद मुक्त कराया गया। उन्होंने कहा कि पिछले 28 वर्षों की सेवा में उन्होंने ऐसी स्थिति पहली बार देखी है।

घटना के बाद नगरासू और आसपास के क्षेत्रों में दहशत का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि रातभर गुरुद्वारे की छत से शोर-शराबा होता रहा और कई बार पत्थर भी फेंके गए। सुरक्षा कारणों से अधिकांश लोग रात में घरों में ही रहे। तनाव को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन रुद्रप्रयाग और श्रीनगर क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद कर दीं ताकि अफवाहों पर रोक लगाई जा सके।

जिलाधिकारी विशाल मिश्रा, पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने लगातार निहंगों से बातचीत की। पुलिस अधीक्षक ने फोन पर भी लंबी वार्ता की, लेकिन प्रारंभिक दौर की बातचीत बेनतीजा रही। रविवार शाम को कई दौर की बातचीत के बाद निहंग वार्ता के लिए तैयार हुए और धीरे-धीरे छत से नीचे उतरने लगे। इसके साथ ही बंधक बनाए गए सेवादार को भी मुक्त कर दिया गया।

घटना की पृष्ठभूमि 16 जून को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में हुई हिंसक झड़प से जुड़ी बताई जा रही है, जिसमें स्थानीय व्यापारियों और कुछ निहंग यात्रियों के बीच विवाद के बाद तलवारबाजी हुई थी। उस मामले में चार निहंगों को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। बताया जा रहा है कि नगरासू में जुटे निहंग उन्हीं की रिहाई की मांग कर रहे थे।

इधर, सुरक्षा के मद्देनजर चमोली और अल्मोड़ा की सीमा से लगे पाडुंवाखाल, नागचूलाखाल और माईथान क्षेत्रों में भी चौकसी बढ़ा दी गई। अतिरिक्त पुलिस बल और आईटीबीपी की तैनाती कर सीमावर्ती क्षेत्रों की निगरानी तेज कर दी गई। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, गुरुद्वारे में अरदास और लंगर सेवा सामान्य रूप से संचालित हो रही है तथा हेमकुंड साहिब यात्रा पूरी तरह सुरक्षित है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से निश्चिंत होकर यात्रा जारी रखने का आग्रह किया है।

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