योगी आदित्यनाथ की जापान यात्रा से हरित ऊर्जा में नई छलांग, उत्तर प्रदेश को वैश्विक नेतृत्व की दिशा

लखनऊ, 27 फरवरी (RNN)।हरित ऊर्जा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को अग्रणी बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हालिया जापान यात्रा को सरकार ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी कदम बताया है। आधिकारिक बयान के अनुसार इस यात्रा के दौरान हुए समझौते स्वच्छ ऊर्जा, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विकास के नए अवसर खोलेंगे।

मुख्यमंत्री चार दिवसीय सिंगापुर और जापान यात्रा पूर्ण कर शुक्रवार सुबह लखनऊ लौटे, जहां चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। सरकार का कहना है कि इस दौरे से प्रदेश को ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक, अनुसंधान और कौशल विकास में अंतरराष्ट्रीय सहयोग मिलेगा।

जापान के यामानाशी प्रांत के साथ हुए समझौता ज्ञापन में ग्रीन हाइड्रोजन सहयोग का केंद्रीय विषय रहा। इस साझेदारी के तहत उत्पादन तकनीक, औद्योगिक उपयोग, प्रशिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में संयुक्त कार्य किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीन हाइड्रोजन ऊर्जा आत्मनिर्भरता और कार्बन उत्सर्जन में कमी के लिए महत्वपूर्ण विकल्प बन रहा है।

यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने यामानाशी स्थित अत्याधुनिक हाइड्रोजन ऊर्जा सुविधा केंद्र का दौरा किया और ‘पावर टू गैस’ प्रणाली का अवलोकन किया। इस प्रणाली में सौर और पवन ऊर्जा से उत्पन्न बिजली को इलेक्ट्रोलिसिस के माध्यम से हाइड्रोजन में परिवर्तित किया जाता है। यह हाइड्रोजन ऊर्जा भंडारण, ईंधन और स्वच्छ परिवहन में उपयोगी होती है, जिससे प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आती है।

राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि इसी मॉडल को उत्तर प्रदेश में लागू करने की संभावनाओं पर कार्य किया जाएगा। बजट 2026-27 में अतिरिक्त ऊर्जा विकास के लिए 2,104 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है, जो अक्षय ऊर्जा ढांचे को मजबूत करने में सहायक होगा।

समझौते का एक प्रमुख पहलू शैक्षणिक और तकनीकी प्रशिक्षण भी है। इसके तहत उत्तर प्रदेश के तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थी जापान में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे और हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण तथा सुरक्षा मानकों की उन्नत तकनीकों से परिचित होंगे। इसी क्रम में आईआईटी कानपुर में ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ विकसित किया जा रहा है, जो अनुसंधान और उद्योग सहयोग का प्रमुख मंच बनेगा।

सरकार का मानना है कि प्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन इस पहल के लिए अनुकूल हैं। स्वच्छ जल, सौर ऊर्जा क्षमता और औद्योगिक आधार को देखते हुए बड़े पैमाने पर ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की संभावनाएं मौजूद हैं।

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार यदि योजनाएं निर्धारित समयसीमा में लागू होती हैं तो उत्तर प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा निवेश, हरित उद्योग और रोजगार सृजन के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है। सरकार ने इसे नेट-जीरो लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है और उम्मीद जताई है कि यह पहल प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा क्रांति का अग्रदूत बना सकती है।

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