राष्ट्रीय सम्मेलन में यूपी की महिला प्रधानों ने बढ़ाया प्रदेश का मान, उत्कृष्ट कार्यों के लिए मिला सम्मान

लखनऊ, 11 मार्च। पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से नई दिल्ली में आयोजित “सशक्त पंचायत नेत्री अभियान” के अंतर्गत एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में उत्तर प्रदेश की महिला पंचायत प्रतिनिधियों ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराते हुए प्रदेश का मान बढ़ाया। सम्मेलन में ग्रामीण विकास और सुशासन में उल्लेखनीय योगदान देने वाली कई महिला प्रधानों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश से 135 महिला प्रधानों ने भाग लेकर पंचायतों में महिला नेतृत्व की प्रभावशाली भूमिका को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। इसके साथ ही प्रदेश से 10 अधिकारियों ने भी सम्मेलन में सहभागिता की।

सम्मेलन के दौरान पंचायत स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिला प्रतिनिधियों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया। “बीकन पंचायत” श्रेणी में हाथरस के राजपुर ग्राम पंचायत की प्रियंका तिवारी, अलीगढ़ के भरतपुर ग्राम पंचायत की नीलम देवी, अमरोहा के फौलादपुर ग्राम पंचायत की मनु यादव, गाजियाबाद के रोरी ग्राम पंचायत की पूनम सिंह तथा ललितपुर के छिपाई ग्राम पंचायत की नीलमणि राजे बुंदेला को उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।

इसी तरह “चैंपियन ऑफ चेंज” श्रेणी में कानपुर नगर के तिलसड़ा ग्राम पंचायत की सुलेखा कुशवाहा और अमरोहा के मखदुमपुर ग्राम पंचायत की मधु चौधरी को सम्मान मिला।

वहीं “महिला हितैषी ग्राम पंचायत” श्रेणी में रामपुर के सींगनखेड़ा ग्राम पंचायत की रूपाली लोधी, फतेहपुर के सुजानपुर ग्राम पंचायत की हेमलता पटेल, बरेली के अल्हैया ग्राम पंचायत की कृष्णा गंगवार, कन्नौज के पाला ग्राम पंचायत की डॉ. अनामिका सिंह तथा लखनऊ के थावर ग्राम पंचायत की माधुरी सिंह को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया।

प्रदेश के ओम प्रकाश राजभर ने इस उपलब्धि पर सभी महिला प्रधानों को बधाई देते हुए कहा कि पंचायतों में महिला जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी ग्रामीण विकास को नई गति दे रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की महिला प्रधानें अपने कार्यों से गांवों के विकास की मिसाल पेश कर रही हैं और पूरे देश के लिए प्रेरणा बन रही हैं।

वहीं पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने कहा कि ऐसे राष्ट्रीय सम्मेलन महिला जनप्रतिनिधियों को अपने अनुभव साझा करने और एक-दूसरे से सीखने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। इससे पंचायत स्तर पर योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और ग्रामीण विकास को गति मिलती है।

उन्होंने कहा कि इन महिला प्रधानों की उपलब्धि न केवल उनके ग्राम पंचायतों के लिए गौरव का विषय है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए प्रेरणादायक उदाहरण भी है।

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