CAA के तहत विदेशी घोषित महिला को मिली भारत की नागरिकता

गुवाहाटी, 7 मार्च : असम के कछार जिले में विदेशी घोषित किए जाने के बाद दो वर्ष हिरासत में बिताने वाली 59 वर्षीय महिला को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत भारत की नागरिकता प्रदान की गई है। यह जानकारी महिला के वकील ने दी।

धोलाई विधानसभा क्षेत्र के हवैथांग इलाके की निवासी दीपाली दास को फरवरी 2019 में एक विदेशी अधिकरण द्वारा अवैध प्रवासी घोषित किया गया था। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर 10 मई 2019 को सिलचर के निरुद्ध केंद्र भेज दिया, जहां उन्होंने लगभग दो वर्ष बिताए। बाद में भारत का उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद 17 मई 2021 को उन्हें जमानत पर रिहा किया गया था।

दीपाली असम की पहली घोषित विदेशी हैं, जिन्हें निरुद्ध केंद्र में रखने के बाद जमानत पर रिहा किया गया और बाद में सीएए के तहत भारतीय नागरिकता प्रदान की गई।

उनके वकील धर्मानंद देब ने बताया कि दीपाली मूल रूप से बांग्लादेश के सिलहट जिले के धीराई थानांतर्गत दिपपुर गांव की निवासी हैं। उन्होंने 1987 में हबीगंज जिले के बनियाचोंग थाना क्षेत्र के पराई गांव के अभिमन्यु दास से विवाह किया था।

उन्होंने बताया कि वर्ष 1988 में यह दंपति भारत आया और असम के कछार जिले में बस गया, जहां वे तब से रह रहे हैं। वर्ष 2013 में पुलिस ने दीपाली की नागरिकता की जांच शुरू की और दो जुलाई 2013 को आरोप-पत्र दाखिल किया, जिसमें कहा गया था कि वह मार्च 1971 के बाद अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाली बांग्लादेशी नागरिक हैं।

देब के अनुसार यही आरोप-पत्र बाद में सीएए के तहत नागरिकता आवेदन में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुआ, क्योंकि इस कानून के तहत आवेदन करने वाले व्यक्ति को यह साबित करना होता है कि वह बांग्लादेश, पाकिस्तान या अफगानिस्तान से भारत आया है।

उन्होंने बताया कि अधिकतर मामलों में आवेदक ऐसे दस्तावेज पेश नहीं कर पाते, लेकिन दीपाली के मामले में पुलिस द्वारा 2013 में दायर आरोप-पत्र में स्पष्ट रूप से उनके बांग्लादेशी मूल का उल्लेख था, जिसे अधिकारियों ने प्रमाण के रूप में स्वीकार कर लिया।

जमानत पर रिहा होने के बाद दीपाली ने सीएए के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करने की इच्छा जताई। 2024 में अधिनियम के नियम अधिसूचित होने के बाद उन्होंने कानूनी सहायता के लिए अपने वकील से संपर्क किया।

उनकी पहली सुनवाई पिछले वर्ष 24 फरवरी को सिलचर स्थित डाकघर अधीक्षक के कार्यालय में हुई थी, जिन्हें इस प्रकार के आवेदनों पर कार्रवाई करने के लिए नामित किया गया है। इसके बाद दो और सुनवाई हुईं और सभी दस्तावेज गृह मंत्रालय को ऑनलाइन जमा कर दिए गए।

दीपाली दास से पहले असम में रहने वाले चार बांग्लादेशी नागरिकों को भी सीएए के तहत भारतीय नागरिकता प्रदान की जा चुकी है।

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