क्या देश में वामपंथी उग्रवाद की जगह दक्षिणपंथी उग्रवाद लेगा: असदुद्दीन ओवैसी


लोकसभा में सरकार से पूछा—क्या अतिवादी कट्टरपंथ पर रोक लगाएंगे, बांग्लादेश और नेपाल के घटनाक्रमों से सीख लेने की दी सलाह

नई दिल्ली, 30 मार्च (RNN)। असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को लोकसभा में सरकार से सवाल किया कि क्या देश में दक्षिणपंथी उग्रवाद धुर वामपंथी उग्रवाद की जगह लेगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश में सबसे बड़ी आबादी युवाओं की है और पड़ोसी देशों में हुए हालिया घटनाक्रमों से सबक लेने की आवश्यकता है।

भारत को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त करने के प्रयास पर चर्चा में भाग लेते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि बांग्लादेश और नेपाल के हालात यह संदेश दे रहे हैं कि बदलाव केवल सरकार बदलने के लिए नहीं, बल्कि शासन में सुधार के लिए होना चाहिए।

उन्होंने किसी दक्षिणपंथी संगठन का नाम लिए बिना आरोप लगाया कि फर्जी मुठभेड़ों, घरों को ध्वस्त करने और आदिवासियों तथा मुसलमानों की गरिमा को प्रभावित करने जैसी घटनाओं के जरिए एक माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे संगठन अतिवादी कट्टरपंथ में विश्वास रखते हैं और सरकार उनका समर्थन कर रही है।

ओवैसी ने सरकार से सवाल करते हुए कहा,
“मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि क्या दक्षिणपंथी उग्रवाद धुर वामपंथी उग्रवाद की जगह लेगा? क्या आप इस अतिवादी कट्टरपंथ पर रोक लगाएंगे?”

एआईएमआईएम सांसद ने चुनावी राज्य असम की सरकार पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि देश में मुसलमानों की बड़ी युवा आबादी है और कुछ बयान ऐसे दिए जा रहे हैं, जिससे उनके राज्य छोड़ने का माहौल बन सकता है। उन्होंने इसे भी एक प्रकार का उग्रवाद बताते हुए इसकी निंदा करने की मांग की।

उन्होंने सत्ता पक्ष के उन दावों पर भी सवाल उठाया, जिनमें कहा गया है कि देश में वामपंथी उग्रवाद समाप्त हो रहा है। ओवैसी ने कहा कि जो लोग हथियार डाल रहे हैं, वे अपनी विचारधारा नहीं छोड़ रहे हैं।

उन्होंने कहा,
“वे हथियार डाल रहे हैं, मगर अपनी विचारधारा पर कायम हैं। यदि वे विचारधारा को नहीं छोड़ेंगे तो आपने कौन सी कामयाबी हासिल कर ली?”

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