लखनऊ, 24 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को रक्षा एवं उच्च प्रौद्योगिकी विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। केशव प्रसाद मौर्य और सुनील कुमार शर्मा के नेतृत्व में उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने जर्मनी के न्यूरेम्बर्ग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय रक्षा प्रदर्शनी MDVITBAM 2026 में भाग लेकर वैश्विक रक्षा कंपनियों के साथ रणनीतिक संवाद किया। यह पहल योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य की औद्योगिक और तकनीकी क्षमता को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
न्यूरेम्बर्ग मेसे में आयोजित प्रदर्शनी के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने अनमैन्ड सिस्टम्स और उन्नत रक्षा तकनीकों पर केंद्रित विशेष गाइडेड डिफेंस वॉकथ्रू में सहभागिता की। इस दौरान कई अग्रणी वैश्विक कंपनियों की ड्रोन, स्वायत्त रक्षा प्रणाली और आधुनिक सुरक्षा तकनीकों का अवलोकन किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने उद्योग विशेषज्ञों के साथ विस्तृत चर्चा करते हुए उत्तर प्रदेश रक्षा कॉरिडोर, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति, डेटा सेंटर नीति तथा निवेश-अनुकूल औद्योगिक ढांचे की विशेषताओं को विस्तार से प्रस्तुत किया।
बैठकों में ड्रोन निर्माण, अनुसंधान एवं विकास, कौशल विकास और तकनीकी हस्तांतरण के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर सकारात्मक विचार-विमर्श हुआ। राज्य सरकार ने रक्षा विनिर्माण इकाइयों की स्थापना, वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ाव और उन्नत प्रौद्योगिकी निवेश के लिए उत्तर प्रदेश को उपयुक्त गंतव्य के रूप में प्रस्तुत किया।
जर्मनी प्रवास के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने फ्रैंकफर्ट और हेसेन क्षेत्र में निवेश संवर्धन से जुड़ी कई उच्चस्तरीय बैठकों में भी भाग लिया। हेसेन सरकार की वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ हुई वार्ता में औद्योगिक और तकनीकी सहयोग को संस्थागत रूप देने पर सहमति बनी। सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े जर्मन उद्योग प्रतिनिधियों ने उत्तर प्रदेश में उन्नत विनिर्माण इकाइयों की स्थापना में रुचि दिखाई।
प्रतिनिधिमंडल ने फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ भी बैठक कर लॉजिस्टिक्स और एयर-कार्गो सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की। इस वार्ता में उत्तर प्रदेश के नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा को वैश्विक कार्गो नेटवर्क से जोड़ने की संभावनाओं पर विशेष जोर दिया गया।
इसके अतिरिक्त, जर्मन तकनीकी संस्थानों और उद्योग समूहों के साथ डेटा सेंटर स्थापना तथा एआई-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के विकास पर भी सहमति बनी। प्रस्तावित परियोजनाओं के तहत गोरखपुर, वाराणसी, लखनऊ और प्रयागराज जैसे प्रमुख शहरों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वास्थ्य अवसंरचना विकसित करने की योजना पर सकारात्मक संकेत मिले हैं।
उपमुख्यमंत्री मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से रक्षा उत्पादन, सेमीकंडक्टर विनिर्माण और डिजिटल प्रौद्योगिकी का उभरता हुआ केंद्र बन रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि वैश्विक कंपनियों के साथ यह सहयोग निवेश, रोजगार और तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई दिशा देगा। वहीं आईटी मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि राज्य की डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर नीति और डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र विदेशी निवेशकों के लिए अत्यंत आकर्षक बनकर उभरा है।
सरकार का मानना है कि जर्मनी में हुई यह रणनीतिक सहभागिता उत्तर प्रदेश को वैश्विक रक्षा नवाचार, उन्नत विनिर्माण और डिजिटल अर्थव्यवस्था के मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। राज्य में रक्षा, एआई, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निवेश को लेकर जो सकारात्मक संकेत मिले हैं, वे आने वाले समय में औद्योगिक विकास और तकनीकी प्रगति को नई गति देने वाले साबित हो सकते हैं।
