प्रयागराज, तीन फरवरी । उत्तर प्रदेश में बुलडोजर के माध्यम से दंडात्मक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के नवंबर 2024 के फैसले में बुलडोजर न्याय को अस्वीकार्य ठहराने के बावजूद प्रदेश में यह कार्रवाई जारी है।
यह टिप्पणी हमीरपुर जिले में याचिकाकर्ताओं की संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई की आशंका जताई गई याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। याचिका में दावा किया गया कि संबंधित प्राथमिकी बीएनएस, पॉक्सो और धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत दर्ज हुई थी, लेकिन याचिकाकर्ता इसमें सह-आरोपी नहीं थे। बावजूद इसके प्रशासन ने उनकी आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियों पर नोटिस जारी किए और कुछ को सील कर दिया।
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने सवाल उठाया कि “क्या किसी अपराध के घटित होने के तुरंत बाद किसी संरचना को ध्वस्त करना, कार्यकारी विवेकाधिकार का दिखावटी प्रयोग है?” अदालत ने यह भी कहा कि कई मामलों में अपराध के तुरंत बाद नोटिस जारी कर और आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना संपत्तियों को ध्वस्त कर दिया गया।
अदालत ने कहा कि इस मामले में राज्य के अधिकार और संविधान के अनुच्छेद 14 व 21 के तहत नागरिकों के अधिकारों का संतुलन बनाना जरूरी है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी को तय की है।
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि पुलिस और अधिकारियों की मिलीभगत से भीड़ ने उनकी संपत्तियों को निशाना बनाया, जबकि वे प्राथमिकी में सह-आरोपी नहीं हैं। राज्य सरकार ने प्रारंभिक आपत्ति जताई कि याचिका समयपूर्व है, लेकिन मौखिक आश्वासन दिया कि कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के बिना कोई ध्वस्तीकरण नहीं किया जाएगा।
नवंबर 2024 में, सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर के माध्यम से न्याय करने की प्रथा को अस्वीकार्य बताते हुए कहा था कि अवैध निर्माण हटाने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। बावजूद इसके, प्रदेश में कई जिलों में दंडात्मक विध्वंस की कार्रवाई जारी है।
अदालत ने 21 जनवरी के आदेश के संदर्भ में सवाल उठाए कि ऐसे मामलों में ध्वस्तीकरण का आधार और प्रक्रिया किस प्रकार सुनिश्चित की जा रही है।
इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि उत्तर प्रदेश में बुलडोजर कार्रवाई पर न्यायिक दृष्टि से कड़ी निगरानी जारी है और प्रशासन को वैधानिक प्रक्रिया के पालन की सख्त चेतावनी दी गई है।
