बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में प्रशासन ने शनिवार को अवैध रूप से निर्मित एक मस्जिद को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई दीवानी अदालत के आदेश पर भारी पुलिस बल और पीएसी की मौजूदगी में की गई। अधिकारियों ने बताया कि मस्जिद सरकारी बंजर भूमि पर अवैध कब्जा कर बनाई गई थी।
सदर क्षेत्र के उप जिलाधिकारी (एसडीएम) प्रमोद कुमार ने बताया कि यह मस्जिद सदर तहसील के भोजीपुरा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पिपरिया में स्थित थी। राजस्व अभिलेखों के अनुसार यह श्रेणी-5 की सरकारी बंजर भूमि है, जिस पर अवैध निर्माण कर कब्जा किया गया था। उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश के अनुपालन में अवैध ढांचे को ध्वस्त कर सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त करा लिया गया है।
एसडीएम ने बताया कि इस भूमि को लेकर वर्ष 2008 से कानूनी विवाद चल रहा था और करीब 18 वर्षों तक मामला विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन रहा। पहले तहसीलदार न्यायालय ने निर्माण को अवैध मानते हुए बेदखली के आदेश पारित किए थे। इसके बाद संबंधित पक्ष ने दीवानी अदालत में याचिका दायर की, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली और मुकदमा खारिज कर दिया गया। अदालत की सभी कानूनी बाधाएं दूर होने के बाद शनिवार को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई।
उन्होंने बताया कि ग्राम समाज की भूमि पर अवैध निर्माण पाए जाने पर संबंधित पक्ष को पहले नोटिस जारी कर स्थान खाली करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अनुपालन न होने पर बुलडोजर कार्रवाई की गई। बेदखली की प्रक्रिया के तहत कब्जा करने वाले पक्ष पर जुर्माना भी लगाया गया था, जिसे पहले ही जमा कराया जा चुका था।
वहीं, स्थानीय निवासी मोहम्मद उमर का कहना है कि मस्जिद-ए-आला हजरत लगभग 50 वर्ष पुरानी थी और इसे बिना किसी पूर्व सूचना के ध्वस्त कर दिया गया। हालांकि प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह न्यायालय के आदेश और कानून के तहत की गई है।
ध्वस्तीकरण के दौरान गांव में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। कई थानों की पुलिस फोर्स और पीएसी के जवान तैनात रहे ताकि किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या न उत्पन्न हो। प्रशासन के अनुसार, इस कार्रवाई से करीब 300 वर्ग गज सरकारी भूमि मुक्त कराई गई है।
मस्जिद को गिराने के बाद उसके मलबे को भी बुलडोजर से हटाया गया और ट्रॉलियों में भरकर ले जाया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
