ब्रिटेन की अदालत ने नीरव मोदी के प्रत्यर्पण मामले को फिर से खोलने से किया इनकार

नई दिल्ली, 26 मार्च (UNS)। ब्रिटेन के उच्च न्यायालय ने भारत सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों की गुणवत्ता पर भरोसा जताते हुए भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी की प्रत्यर्पण के खिलाफ मामले को फिर से खोलने की याचिका खारिज कर दी है।

लॉर्ड जस्टिस स्टुअर्ट स्मिथ और जस्टिस जे की पीठ ने बुधवार को अपराध प्रक्रिया नियमों के तहत दायर अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच भारत की ओर से दिए गए कूटनीतिक हलफनामे “व्यापक, विस्तृत और प्रामाणिक” हैं, जिनके आधार पर मामले को दोबारा खोलने की जरूरत नहीं है।

पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से करीब 13,000 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में वांछित नीरव मोदी ने रक्षा सलाहकार संजय भंडारी के प्रत्यर्पण मामले में फरवरी 2025 में आए फैसले का हवाला देते हुए अपने मामले को फिर से खोलने के लिए लंदन की अदालत का दरवाजा खटखटाया था। भंडारी मामले में ब्रिटेन की अदालत ने भारतीय एजेंसियों द्वारा यातना दिए जाने की आशंका के आधार पर प्रत्यर्पण को रद्द कर दिया था।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जब 2022 में नीरव मोदी का मामला उनके सामने आया था, तब भंडारी मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य या तो उपलब्ध नहीं थे या अदालत के संज्ञान में नहीं लाए गए थे। अदालत ने यह भी कहा कि भंडारी मामले का फैसला प्रतिबंधित तरीकों के इस्तेमाल से इकबालिया बयान हासिल करने की चिंताजनक तस्वीर पेश करता है।

फैसले का प्रमुख आधार दो दिसंबर 2025 को भारत के गृह मंत्रालय द्वारा ब्रिटेन सरकार को भेजा गया ‘नोट वर्बल’ है, जिस पर संयुक्त सचिव राकेश पांडेय के हस्ताक्षर हैं। इस दस्तावेज में आश्वासन दिया गया है कि नीरव मोदी से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ), राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) या केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) पूछताछ नहीं करेंगे।

‘नोट वर्बल’ में यह भी उल्लेख किया गया है कि नीरव मोदी को मुंबई की आर्थर रोड जेल में रखा जाएगा और उसे मिलने वाली सुविधाओं तथा कानूनी सहायता की विस्तृत योजना तैयार की गई है। अदालत ने कहा कि 12 फरवरी 2026 को भारतीय उच्चायोग द्वारा भेजे गए एक अन्य नोट वर्बल में इन आश्वासनों को बाध्यकारी बताया गया है और यह सुनिश्चित किया गया है कि भारत की सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियां इनका ईमानदारी से पालन करेंगी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि ये ठोस आश्वासन नहीं दिए गए होते, तो विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए मामले को फिर से खोलने पर विचार किया जा सकता था।

गौरतलब है कि नीरव मोदी पर अपने मामा मेहुल चोकसी के साथ मिलकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक पीएनबी के साथ कथित रूप से हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। वह 19 मार्च 2019 से ब्रिटेन की जेल में बंद है और भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया लंबे समय से जारी है।

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