गुजरात में पारित यूसीसी विधेयक असंवैधानिक और मुस्लिम अधिकारों के खिलाफ : ओवैसी

अहमदाबाद, चार अप्रैल (UNS)। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख और हैदराबाद से लोकसभा सदस्य असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार को कहा कि गुजरात विधानसभा द्वारा हाल ही में पारित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक और अशांत क्षेत्र अधिनियम में संशोधन असंवैधानिक हैं और मुस्लिम समुदाय के अधिकारों के खिलाफ हैं।

गुजरात विधानसभा ने पिछले सप्ताह सात घंटे से अधिक चली लंबी बहस के बाद यूसीसी विधेयक पारित किया था। इस विधेयक का उद्देश्य धर्म से परे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और सहजीवन (लिव-इन रिलेशनशिप) को विनियमित करने के लिए एक समान कानूनी ढांचा स्थापित करना है। इसमें बल, दबाव या धोखाधड़ी से किए गए विवाह के लिए सात वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है, साथ ही जीवनसाथी के जीवित रहते दूसरी शादी पर रोक और विवाह व सहजीवन संबंध का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।

ओवैसी ने संवाददाताओं से कहा कि यूसीसी एक नीति निर्देशक सिद्धांत है, मौलिक अधिकार नहीं, जिसका उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 44 में किया गया है। उन्होंने कहा कि संविधान सभा की बहस के दौरान भीमराव आंबेडकर ने यह नहीं कहा था कि संहिता बनने के बाद राज्य इसे सभी नागरिकों पर अनिवार्य रूप से लागू करेगा।

ओवैसी ने आरोप लगाया कि यह विधेयक उत्तराखंड में पारित समान नागरिक संहिता की हूबहू नकल है, जिसमें हिंदू विवाह और उत्तराधिकार संबंधी कानूनों को अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर अन्य समुदायों पर लागू किया गया है, इसलिए यह वास्तव में समान कानून नहीं है।

उन्होंने कहा कि यह प्रावधान मुसलमानों के अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है। ओवैसी ने कहा, “पीड़ित पक्ष मुसलमान हैं। यह असंवैधानिक है। अगर किसी को तलाक लेना हो, तो उन्हें व्यभिचार साबित करना होगा और न्यायिक हिरासत में रहना होगा। यह सब हिंदू धर्म का हिस्सा है, इसे हम पर क्यों लागू किया जा रहा है?”

एआईएमआईएम अध्यक्ष ने सहजीवन (लिव-इन रिलेशनशिप) से संबंधित प्रावधानों की भी कड़ी आलोचना की और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से सवाल किए। उन्होंने दलील दी कि यह विवाह की पवित्रता को प्रभावित करता है और इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ है।

ओवैसी ने गुजरात के अशांत क्षेत्रों में अचल संपत्ति के हस्तांतरण और किरायेदारों की सुरक्षा से संबंधित 1991 के अधिनियम में किए गए संशोधन की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इसमें “पीड़ित व्यक्ति” की परिभाषा का विस्तार किया गया है, जिससे कोई तीसरा व्यक्ति भी किसी संपत्ति सौदे के खिलाफ आपत्ति दर्ज करा सकता है, जो उनके अनुसार उच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों के विपरीत है।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि एआईएमआईएम गुजरात में आगामी निकाय चुनावों में छह नगर निगमों, 29 तालुका पंचायतों और 28 जिला पंचायतों में चुनाव लड़ेगी तथा कुल 539 उम्मीदवार मैदान में उतारेगी।

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