आज का राजा गाय को माता नहीं मान रहा, इसलिए उसे ललकारना जरूरी : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

जौनपुर/वाराणसी/सुलतानपुर, 7 मार्च (RNN): ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शनिवार को कहा कि आज का राजा गाय को माता नहीं मान रहा है, बल्कि उसे संपत्ति के रूप में देखने लगा है, ऐसे में उसे ललकारना जरूरी हो गया है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शनिवार को काशी से लखनऊ के लिए अपनी यात्रा की शुरुआत की। वह 11 मार्च को लखनऊ पहुंचकर गो-रक्षा अभियान के अगले चरण का शंखनाद करेंगे।

यात्रा के दौरान वह उत्तर प्रदेश के जौनपुर पहुंचे, जहां गोमती नदी तट पर स्थित जमैथा गांव में महर्षि यमदग्नि मुनि के आश्रम में दर्शन-पूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज शासन व्यवस्था गाय को माता के रूप में नहीं, बल्कि केवल संपत्ति के रूप में देख रही है, जो भारतीय परंपरा और आस्था के विपरीत है।

शंकराचार्य ने कहा कि जौनपुर की धरती महर्षि यमदग्नि और भगवान परशुराम की तपोभूमि रही है। उन्होंने बताया कि गोमती नदी के किनारे गाय की सेवा और संरक्षण की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि इसी स्थान पर महर्षि यमदग्नि ने गाय की सेवा की थी और जब उस समय के राजा ने उनकी गाय जबरन छीन ली थी, तब भगवान परशुराम ने अन्याय के खिलाफ खड़े होकर राजा और उसकी सेना का वध कर गाय को वापस लिया था।

उन्होंने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में माता के समान मानी जाती है। यदि शासन व्यवस्था उसे केवल संपत्ति मानकर देखेगी तो यह आस्था का अपमान होगा और संत समाज को इस विषय पर आवाज उठानी पड़ेगी।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वह महर्षि यमदग्नि का आशीर्वाद लेकर अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने का संकल्प लेकर निकले हैं। उन्होंने कहा कि संत समाज का दायित्व है कि वह समाज और धर्म की रक्षा के लिए समय-समय पर सच बोले और अन्याय का विरोध करे।

इस दौरान आश्रम में बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु मौजूद रहे। शंकराचार्य ने पूजा-अर्चना कर देश और समाज के कल्याण की कामना भी की।

इससे पहले वाराणसी में प्रस्थान से पूर्व उन्होंने आश्रम में पूजन-अर्चन किया और संकट मोचन हनुमान मंदिर तथा चिंतामणि गणेश मंदिर सहित कई मंदिरों में दर्शन कर हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ किया। इसके बाद वह संतों और अनुयायियों के साथ बस से लखनऊ के लिए रवाना हुए।

उन्होंने बताया कि 11 मार्च को लखनऊ में गो-रक्षा अभियान का बड़ा शंखनाद किया जाएगा और उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी इस अभियान से जुड़ने का निमंत्रण दिया है।

शंकराचार्य ने कहा कि गौमाता को ‘राजमाता’ घोषित करने और उत्तर प्रदेश में पूर्ण रूप से गोकशी बंद कराने के लिए 40 दिन की समयसीमा दी गई थी, जो 11 मार्च को पूरी हो रही है। इसके बाद लखनऊ में आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।

सुलतानपुर जिले में प्रवेश करने पर लम्भुआ तहसील मुख्यालय पर उनका स्वागत किया गया। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद से ही गोरक्षा कानून लागू करने का सपना दिखाया गया, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया जा सका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 78 वर्षों से प्रतीक्षित इस कानून को अब और लंबित रखना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि वह देश और प्रदेश के सदनों में गोरक्षा विधेयक लागू कराने की मांग को लेकर लखनऊ जा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि यदि जनप्रतिनिधि जनता की भावनाओं को सदन में नहीं उठा सकते, तो ऐसे प्रतिनिधियों की उपयोगिता पर प्रश्न उठता है।

शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पांडेय ने बताया कि यात्रा के दौरान वह शनिवार रात रायबरेली में विश्राम करेंगे और रविवार को आसपास के जिलों में कार्यक्रमों में भाग लेंगे। उन्होंने बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 11 मार्च को लखनऊ पहुंचेंगे।

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