लखनऊ, 12 फरवरी । उत्तर प्रदेश सरकार के संसदीय कार्य एवं वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बृहस्पतिवार को विधानसभा में कहा कि राज्य में आपराधिक घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार कई राज्य अपराध के मामलों में उत्तर प्रदेश से आगे हैं।
विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन नियम 56-के तहत कार्यस्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) की सदस्य डॉ. रागिनी सोनकर, अतुल प्रधान और अन्य विपक्षी सदस्यों द्वारा उठाए गए कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर सरकार का पक्ष रखते हुए खन्ना ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया।
विपक्ष ने उठाए गंभीर मुद्दे
डॉ. रागिनी सोनकर ने प्रयागराज में चार बच्चों के शव तालाब में मिलने की घटना का उल्लेख करते हुए कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि खटीक समाज (अनुसूचित जाति) के 17, 16, 11 और सात वर्षीय चार बच्चों के शव मकर संक्रांति की शाम को उनके घर के पास एक तालाब से बरामद किए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चों के शरीर पर कपड़े नहीं थे और घटना ने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
सोनकर ने एक कथित पुलिस मुठभेड़ का भी जिक्र किया, जिसमें अनुसूचित जाति के दो युवकों में एक की मौत और दूसरा घायल हुआ। उन्होंने कहा कि सजा देने का अधिकार केवल अदालत को है और पुलिस द्वारा मुठभेड़ के नाम पर कार्रवाई चिंता का विषय है। उन्होंने दावा किया कि दलित उत्पीड़न, हिरासत में मौत और फर्जी मुठभेड़ों के मामलों में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है।
सपा सदस्य अतुल प्रधान ने मेरठ में एक महिला की हत्या और उसकी बेटी के अपहरण तथा सरधना थाना क्षेत्र में सोनू कश्यप को जिंदा जलाने की घटना का मुद्दा उठाते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया। विपक्षी सदस्यों ने इन मामलों पर सदन की कार्यवाही स्थगित कर चर्चा कराने की मांग की।
सरकार ने आंकड़ों के आधार पर किया जवाब
संसदीय कार्य मंत्री खन्ना ने एनसीआरबी के 2023 तक उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2017 से 2023 के बीच प्रदेश में अपराध दर में लगातार गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति-जनजाति के विरुद्ध हत्या के मामलों में 43 प्रतिशत की कमी आई है।
खन्ना ने यह भी कहा कि 2016 की तुलना में 2023 में महिलाओं से बलात्कार के मामलों में 32 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। उनके अनुसार, महिलाओं के विरुद्ध अपराध के मामलों में उत्तर प्रदेश का स्थान 17वां है और 16 राज्य इससे आगे हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, राजस्थान और ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों में अपराध के आंकड़े उत्तर प्रदेश से अधिक हैं।
उन्होंने कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत उठाए गए मामलों में की गई प्रशासनिक और पुलिस कार्रवाई का भी विवरण सदन में प्रस्तुत किया।
कार्यस्थगन प्रस्ताव नामंजूर
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कार्यस्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य घोषित कर दिया, जिसके बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी।
सदन में कानून-व्यवस्था को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली, जिसमें दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क और आंकड़े पेश किए।
