प्राथमिकी में उचित धाराएं न लगाने पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछे सवाल

नयी दिल्ली, तीन फरवरी । सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वर्ष 2021 में नोएडा में कथित घृणा अपराध से जुड़े मामले को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार से कड़े सवाल पूछे। न्यायालय ने जानना चाहा कि प्राथमिकी दर्ज करते समय भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की उपयुक्त धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें जुलाई 2021 में नोएडा में कथित रूप से दुर्व्यवहार और यातना का शिकार हुए एक वरिष्ठ नागरिक ने निष्पक्ष जांच और सुनवाई की मांग की है।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने पीठ को बताया कि इस मामले में संबंधित जांच अधिकारी के खिलाफ छानबीन शुरू कर दी गई है। इस पर पीठ ने सवाल किया, “क्या केवल जांच शुरू कर देने से यह समस्या हल हो जाती है कि प्राथमिकी में उचित प्रावधान क्यों नहीं लगाए गए?”

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने दलील दी कि प्राथमिकी आईपीसी की धारा 153-बी और 295-ए के तहत दर्ज की जानी चाहिए थी। उन्होंने बताया कि धारा 153-बी राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक आरोपों और टिप्पणियों से संबंधित है, जबकि धारा 295-ए किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्यों से जुड़ी है। अहमदी ने आईपीसी की धारा 298 का भी उल्लेख किया, जो धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से की गई टिप्पणी से संबंधित है।

अहमदी ने कहा कि इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जो राष्ट्रीय एकता के लिए ठीक नहीं हैं। इस पर पीठ ने टिप्पणी की, “हमें इसे वह रंग नहीं देना चाहिए।” न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह एक व्यक्तिगत घटना है, जिसके संदर्भ में याचिका दायर की गई है और अदालत सरकार से उचित कार्रवाई की अपेक्षा करती है।

सुनवाई के दौरान पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि लगाए गए आरोपों के तहत मामला दर्ज क्यों नहीं किया गया। नटराज ने इसे जांच अधिकारी की गलती बताया। इस पर पीठ ने कहा, “जांच शुरू करना इस सवाल का जवाब नहीं है कि अपराध दर्ज क्यों नहीं किए गए।”

न्यायालय ने यह भी कहा कि जब तक उचित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज नहीं होती और यह जांच नहीं की जाती कि अपराध बनता है या नहीं, तब तक मामला आगे कैसे बढ़ेगा। पीठ ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 196 के तहत अभियोजन की मंजूरी के प्रावधान का भी उल्लेख किया।

पीठ ने विधि अधिकारी को इस संबंध में निर्देश प्राप्त करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया और मामले की अगली सुनवाई 13 फरवरी को तय की।

याचिका में गौतम बुद्ध नगर जिले के कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय या दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि चार जुलाई 2021 को नोएडा में लोगों के एक समूह ने उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर उनके साथ बदसलूकी की और हमला किया। याचिका के अनुसार, उनकी दाढ़ी और मुस्लिम होने की पहचान को लेकर अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था।

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