नयी दिल्ली, 27 मार्च (UNS)। राज्यसभा में शुक्रवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण के मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार को केवल पत्र लिखने के बजाय उन्हें कानून में प्रस्तावित बदलावों पर चर्चा के लिए आगे आना चाहिए।
रीजीजू ने कहा कि इस विषय पर सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी और सरकार ने विपक्ष को यह भरोसा दिलाया है कि राजनीतिक दलों से परामर्श किए बिना महिला आरक्षण विधेयक को लेकर कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार सभी दलों के साथ संवाद बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
इससे पहले, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने महिला आरक्षण कानून में संशोधन को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाने के वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के दावे पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक की मांग कर रहे हैं, क्योंकि पांच राज्यों में चुनाव होने हैं।
रमेश ने स्पष्ट किया कि अभी तक महिला आरक्षण विधेयक पर कोई औपचारिक सर्वदलीय बैठक नहीं हुई है। उनके इस बयान का खंडन करते हुए संसदीय कार्य मंत्री रीजीजू ने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ बैठकें हो चुकी हैं और सरकार का इरादा सभी दलों से व्यापक परामर्श करने का है।
रीजीजू ने कहा कि चाहे सभी दल एक साथ बैठक करें या अलग-अलग, यह सरकार की कार्यप्रणाली का हिस्सा है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वह एकमात्र ऐसा राजनीतिक दल है जो चर्चा के लिए आगे नहीं आ रहा है और साथ ही सर्वदलीय बैठक की मांग भी कर रहा है।
वित्त विधेयक 2026 पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा कि महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठकें हुई हैं।
रीजीजू ने कहा कि सरकार विपक्ष से बिना पूछे कोई निर्णय नहीं ले रही है और बार-बार संवाद के लिए आमंत्रित कर रही है। उन्होंने कहा, “हम आपसे बार-बार कह रहे हैं कि हमसे बात करें। हमारा व्यवहार सहयोगात्मक है, लेकिन विपक्ष आगे नहीं आ रहा है और केवल पत्र लिख रहा है।”
