लखनऊ, 22 मार्च । अखिलेश यादव ने देश में महिलाओं की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि यदि किसी समाज या देश की वास्तविक स्थिति को समझना है, तो वहां की महिलाओं की हालत को देखना होगा। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान समय में देश में महिलाओं और बहनों की स्थिति “बहुत खराब” है और उनके सशक्तिकरण के बिना समाज की प्रगति संभव नहीं है।
समाजवादी पार्टी (सपा) कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में, जहां अलग-अलग जाति और धर्म के लोग रहते हैं, वहां महिलाओं की स्थिति का आकलन करने पर स्पष्ट होता है कि उन्हें अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आधी आबादी की भागीदारी के बिना सच्ची तरक्की नामुमकिन है, इसलिए महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में शामिल करना आवश्यक है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर महिला सुरक्षा, महिला स्वास्थ्य, महिला सम्मान और महिला खुशहाली से जुड़ी योजनाओं को और प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी अगले वर्ष होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) के सहयोग से सरकार बनाने का लक्ष्य रखती है और महिलाओं के कल्याण के लिए विशेष योजनाएं शुरू करेगी।
अखिलेश यादव ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान शुरू की गई महिला हेल्पलाइन महिला हेल्पलाइन 1090 का उल्लेख करते हुए कहा कि शुरुआत में कई लोगों को इस पहल की सफलता पर संदेह था, लेकिन बाद में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में यह एक प्रभावी माध्यम साबित हुई। उन्होंने बताया कि इस पहल की सराहना देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा भी की गई थी और अन्य राज्यों को इससे सीख लेने की सलाह दी गई थी।
सपा प्रमुख ने अपने पिता एवं पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा शुरू की गई कन्या विद्याधन योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय लड़कियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए ऐसी कोई व्यापक योजना नहीं थी, लेकिन इस योजना ने बेटियों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में मौजूद उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने कहा कि अखिलेश यादव के कार्यकाल में महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर निगरानी रखने के लिए अपर पुलिस महानिदेशक स्तर का एक विशेष पद सृजित किया गया था, जिस पर महिला अधिकारी की तैनाती की जाती थी। उन्होंने बताया कि उस व्यवस्था के तहत महिलाओं के खिलाफ अपराधों की रोकथाम और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए एक सशक्त तंत्र विकसित किया गया था।
