तारिक रहमान बांग्लादेश में नए चेहरे के तौर पर उभरे

ढाका, 13 फरवरी। लंदन में 17 वर्षों तक स्वनिर्वासन में रहे तारिक रहमान आम चुनाव में बांग्लादेश की राजनीति के नए चेहरे के रूप में उभरे हैं। उनके पिता द्वारा स्थापित बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने 297 में से 209 सीटें जीतकर करीब 20 वर्षों के अंतराल के बाद सत्ता में वापसी की है।

दक्षिणपंथी जमात-ए-इस्लामी को 68 सीटें मिलीं। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था। चुनाव में 59.44 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

बीएनपी की स्थापना रहमान के पिता जियाउर रहमान ने की थी, जो सैन्य शासक से राजनीतिज्ञ बने थे। 1981 में उनकी हत्या के बाद पार्टी का नेतृत्व लगभग चार दशकों तक रहमान की मां खालिदा जिया ने किया।

पिछले वर्ष दिसंबर में बांग्लादेश लौटने पर तारिक रहमान का भव्य स्वागत हुआ, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उनकी मां खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। चुनाव से पहले उत्पन्न राजनीतिक शून्य के बीच रहमान ने पार्टी अध्यक्ष के रूप में कमान संभाली।

उतार-चढ़ाव भरा सफर

रहमान को व्यापक रूप से वंशवादी राजनीति की उपज माना जाता है, किंतु उन्होंने जटिल परिस्थितियों में पार्टी को संगठित रखते हुए चुनावी जीत सुनिश्चित करने का श्रेय प्राप्त किया। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान संयमित और सुलहकारी रुख अपनाया, जबकि उनके परिवार और अवामी लीग के बीच संबंध लंबे समय से कटु रहे हैं।

उनका जन्म 20 नवंबर 1965 को ढाका में हुआ था। 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान उन्हें अपनी मां और भाई के साथ गिरफ्तार किया गया था, लेकिन 16 दिसंबर 1971 को रिहा कर दिया गया, जब बांग्लादेश को पाकिस्तान से स्वतंत्रता मिली।

उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संबंधों की पढ़ाई की, हालांकि बाद में पढ़ाई छोड़कर व्यवसाय शुरू किया। वर्ष 2009 में वह बीएनपी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बने और धीरे-धीरे पार्टी के पुनर्गठन में सक्रिय भूमिका निभाने लगे।

विवाद और कानूनी चुनौतियां

अवामी लीग शासनकाल में रहमान भ्रष्टाचार और अन्य आपराधिक मामलों में आरोपी बने। वर्ष 2004 में शेख हसीना की रैली पर हुए ग्रेनेड हमले के मामले में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जिसमें 24 लोगों की मौत हुई थी। रहमान ने इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए खारिज किया। बाद में अंतरिम शासनकाल के दौरान उन्हें इन मामलों में बरी कर दिया गया।

2008 में इलाज के लिए विदेश जाने के बाद वह लंदन में रहे। 2018 में खालिदा जिया के जेल जाने पर उन्हें पार्टी का कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया और बाद में मां के निधन के बाद वह अध्यक्ष बने।

अब भारी बहुमत से मिली जीत के बाद तारिक रहमान बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बनने की राह पर हैं, जिससे देश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।

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