नयी दिल्ली, चार दिसंबर – उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को केंद्र सरकार से पूछा कि क्या जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उनकी हिरासत पर पुनर्विचार करने की कोई संभावना है। अदालत ने कहा कि वांगचुक की स्वास्थ्य रिपोर्ट संतोषजनक नहीं है और इस पहलू पर मानवीय दृष्टिकोण से विचार किया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज से कहा कि वह इस संबंध में निर्देश प्राप्त करें। पीठ ने कहा, “दलीलों, जवाबी दलीलों और कानूनी पहलुओं के अलावा, एक अधिकारी होने के नाते इस पहलू पर भी विचार करें।”
पीठ ने उल्लेख किया कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति की स्वास्थ्य रिपोर्ट से पता चलता है कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है और उन्हें आयु संबंधी तथा अन्य चिकित्सकीय समस्याएं हैं। अदालत ने पूछा, “हमने जो रिपोर्ट देखी है, उससे स्पष्ट है कि उनकी स्थिति ठीक नहीं है। क्या सरकार इस पर पुनर्विचार कर सकती है?”
इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नटराज ने कहा कि वह संबंधित प्राधिकारियों से इस विषय पर सुझाव लेंगे।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि वांगचुक पिछले वर्ष लेह में हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी और 161 लोग घायल हुए थे। नटराज ने कहा कि वांगचुक के कथित भड़काऊ भाषणों और उकसावे के कारण यह हिंसा हुई। उन्होंने दलील दी कि किसी व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी आवश्यक नहीं होती, बल्कि लोगों के समूह को प्रभावित करना ही पर्याप्त होता है।
नटराज ने यह भी बताया कि वांगचुक के हिरासत आदेश को तीन अक्टूबर 2025 को मंजूरी दी गई थी और उस मंजूरी आदेश को चुनौती नहीं दी गई है।
अदालत ने कहा कि मामले में दलीलें बृहस्पतिवार को भी जारी रहेंगी।
शीर्ष अदालत राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) जैसे कठोर कानून के तहत सोनम वांगचुक की हिरासत के खिलाफ दायर उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो की याचिका पर सुनवाई कर रही है। गौरतलब है कि लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और उसे छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत होने के दो दिन बाद 26 सितंबर 2025 को वांगचुक को हिरासत में लिया गया था।
