पराग से पौष्टिक आहार, समय पर बजट व्यय और दुग्ध समितियों को भुगतान के निर्देश
लखनऊ, 19 जनवरी 2026। उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि गो आश्रय स्थलों के निरीक्षण के दौरान यदि व्यवस्थाएं सही नहीं पाई गईं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि गोशालाओं के संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही, उदासीनता या अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सोमवार को विधान भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में प्रदेश के गौ आश्रय स्थलों की अद्यतन स्थिति की समीक्षा करते हुए मंत्री ने निर्देश दिए कि नोडल अधिकारी निरीक्षण के समय सभी व्यवस्थाओं की गहन जांच करें और कमियां मिलने पर तत्काल स्पष्टीकरण प्राप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गो आश्रय स्थल पर चारा, भूसा, पानी, प्रकाश, दवा और अन्य आवश्यक सुविधाएं अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाएं।
धर्मपाल सिंह ने निर्देशित किया कि पराग के माध्यम से पौष्टिक पशु आहार गोशालाओं को उपलब्ध कराया जाए तथा गौशालाओं को गोद लेने के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं को प्रोत्साहित किया जाए। मण्डल स्तरीय जनपदों की गौशालाओं में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। पशुओं के उपचार और टीकाकरण के लिए दवाइयों एवं वैक्सीन की पर्याप्त व्यवस्था रखने के निर्देश भी दिए गए।
मंत्री ने विशेष रूप से ठंड के मौसम को देखते हुए गोवंश के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि त्रिपाल, अलाव और अन्य आवश्यक इंतजाम पर्याप्त मात्रा में किए जाएं, ताकि ठंड के कारण किसी भी गोवंश की मृत्यु न हो। उन्होंने पशुचिकित्साधिकारियों को निर्देश दिया कि वे नियमित रूप से गो आश्रय स्थलों का दौरा कर गोवंश के स्वास्थ्य, चिकित्सा और औषधि की व्यवस्था सुनिश्चित करें। साथ ही हरे चारे और पशु आहार की अतिरिक्त व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए गए।
अवस्थापना संबंधी कार्यों की समीक्षा करते हुए मंत्री ने कहा कि बजट का समय पर आवंटन कर निर्माण कार्य निर्धारित अवधि में पूर्ण कराए जाएं और गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। उन्होंने बताया कि अब तक 76 प्रतिशत बजट व्यय किए जाने पर संतोष व्यक्त किया गया है तथा शेष बजट शीघ्र ही योजनाओं के लिए जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी मद का बजट सरेंडर नहीं होना चाहिए। बैठक में बताया गया कि वर्तमान में प्रदेश में 7,497 गो आश्रय स्थल संचालित हैं, जिनमें 12,38,447 निराश्रित गोवंश संरक्षित किए गए हैं।
दुग्ध विकास विभाग की समीक्षा के दौरान धर्मपाल सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि दुग्ध समितियों की पुरानी क्रियान्वयन पद्धति की समीक्षा कर वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप ठोस कार्य योजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि पुरानी दुग्ध समितियां किसी भी दशा में बंद न हों और जो नई समितियां गठित हो चुकी हैं, उनका विधिवत संचालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही दुग्ध समितियों का भुगतान समय पर किए जाने और पराग उत्पादों की बिक्री व गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।
बैठक में पशुधन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने मंत्री को विभागीय योजनाओं की अद्यतन प्रगति से अवगत कराया और आश्वासन दिया कि प्राप्त दिशा-निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने निदेशक, पशुधन को निर्देशित किया कि मण्डलवार प्रतिदिन गौशालाओं की स्थिति की समीक्षा कर रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराई जाए।
बैठक में पशुधन विभाग के विशेष सचिव देवेन्द्र पाण्डेय, पीसीडीएफ के प्रबंध निदेशक वैभव श्रीवास्तव, दुग्ध विकास विभाग के विशेष सचिव राम सहाय यादव, निदेशक (प्रशासन एवं विकास) डॉ. मेम पाल सिंह, निदेशक (रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, संयुक्त निदेशक डॉ. पी.के. सिंह सहित पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
