SIR पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा का बयान, विपक्ष ने लगाए भेदभाव के आरोप

गुवाहाटी, 24 जनवरी । असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने शनिवार को स्पष्ट किया कि राज्य में चल रहे मतदाता सूची के SIR अभियान को लेकर कोई विवाद नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया के तहत न तो किसी हिंदू और न ही किसी असमिया मुस्लिम को नोटिस भेजा गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, नोटिस केवल ‘मिया’ समुदाय—जिससे आशय बांग्ला भाषी मुसलमानों से है—को भेजे जा रहे हैं।

नलबाड़ी जिले में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में शर्मा ने कहा, “विशेष पुनरीक्षण को लेकर कोई विवाद नहीं है। किस हिंदू को नोटिस मिला है? किस असमिया मुस्लिम को नोटिस मिला है? नोटिस मिया और ऐसे लोगों को भेजे गए हैं, ताकि वे इस प्रक्रिया का अनुचित लाभ न उठा सकें।”

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह रणनीति संबंधित समुदाय को “दबाव में रखने” के लिए अपनाई जा रही है। उन्होंने दोहराया कि उनके शासनकाल में मिया समुदाय को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। शर्मा के अनुसार, “उन्हें यह समझना होगा कि असम की जनता किसी न किसी स्तर पर उनका विरोध कर रही है। अन्यथा, उन्हें बिना अनुमति के जीत मिल जाएगी।”

विपक्षी दलों ने विशेष पुनरीक्षण (SIR)अभियान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि विधानसभा चुनावों से पहले यह अभियान ‘भाजपा एजेंटों’ द्वारा वास्तविक नागरिकों, विशेषकर धार्मिक अल्पसंख्यकों, को परेशान करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है। उल्लेखनीय है कि फॉर्म-7 के माध्यम से किसी व्यक्ति का नाम स्थायी स्थानांतरण, पहले से पंजीकरण या भारतीय नागरिक न होने के आधार पर हटाने का अनुरोध किया जा सकता है।

इसी क्रम में कांग्रेस की राज्य इकाई के एक पदाधिकारी ने शुक्रवार को बोको-छायगांव विधानसभा क्षेत्र में विशेष पुनरीक्षण अभियान में शामिल स्थानीय भाजपा नेताओं और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाताओं के नाम अनधिकृत रूप से हटाने और जोड़ने का प्रयास किया गया।

हालांकि मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “छिपाने जैसा कुछ नहीं है। हम सब कुछ कानून के दायरे में रहकर कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि सरकार गरीबों और दलितों के साथ है, लेकिन उन लोगों के साथ नहीं जो असम की सामाजिक संरचना को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं।

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