वरिष्ठ शिक्षकों को ‘टीईटी’ प्रावधान से छूट देने की राज्यसभा में उठी मांग

नयी दिल्ली, 12 मार्च । राज्यसभा में बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी के एक सदस्य ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के अनिवार्य प्रावधान से वरिष्ठ शिक्षकों को हो रही परेशानियों का मुद्दा उठाते हुए उन्हें इससे छूट देने की मांग की।

भाजपा सदस्य धनंजय भीमराव महादिक ने उच्च सदन में विशेष उल्लेख के जरिए यह मुद्दा उठाया और कहा कि यह लाखों शिक्षकों और देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य की गई है। उनके अनुसार इस प्रावधान का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है, जो एक सराहनीय कदम है।

हालांकि महादिक ने कहा कि इस नियम के कारण उन वरिष्ठ और अनुभवी शिक्षकों के सामने समस्या पैदा हो रही है जो पिछले 20 से 25 वर्षों से लगातार अध्यापन कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रावधान से वरिष्ठ शिक्षकों में मानसिक दबाव बढ़ रहा है और सेवा सुरक्षा को लेकर असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है।

उन्होंने कहा कि जो शिक्षक दशकों से छात्रों को पढ़ा रहे हैं, उनके अनुभव और सेवा को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। इसलिए केंद्र सरकार को चाहिए कि 20 से 25 वर्ष तक सेवा दे चुके वरिष्ठ शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दी जाए, जिससे लाखों शिक्षकों को राहत मिल सके।

इसी दौरान विशेष उल्लेख के जरिए भाजपा के लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने छावनी क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाए, जबकि उनकी ही पार्टी की माया नारोलिया ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की चुनौतियों का जिक्र किया।

तेलुगु देशम पार्टी के मस्थान राव यादव वीधा ने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (एमपीलैड) में वृद्धि की मांग की, वहीं भाजपा के भीम सिंह ने राष्ट्रीय दिव्यांग आयोग के गठन की आवश्यकता बताई।

आम आदमी पार्टी के संदीप कुमार पाठक ने कोचिंग संस्थानों की ऊंची फीस का मुद्दा उठाया, जबकि कांग्रेस के अखिलेश प्रसाद सिंह ने पटना के पास फुलवारीशरीफ में रेलवे क्रॉसिंग बंद होने से लोगों को हो रही परेशानी का जिक्र करते हुए वहां जल्द अंडरपास निर्माण पूरा कराने की मांग की।

इसके अलावा बीजू जनता दल के निरंजन बिशी ने ओडिशा में एम्स अस्पताल स्थापित करने की मांग की, जबकि मनोनीत सदस्य सतनाम सिंह संधू ने डेयरी उद्योग से जुड़े मुद्दे उठाए।

भाजपा के दोरजी त्सेरिंग लेपचा, मयंक कुमार नायक, रायगा कृष्णैया और वाईएसआर कांग्रेस के सुभाषचंद्र बोस पिल्लै ने भी विशेष उल्लेख के जरिए अपने-अपने मुद्दे सदन में उठाए।

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