ड्रोन निर्माण में आत्मनिर्भरता जरूरी, वैश्विक संघर्षों से मिला सबक : राजनाथ सिंह

नई दिल्ली, 19 मार्च। राजनाथ सिंह ने रूस-यूक्रेन और ईरान-इजराइल जैसे वैश्विक संघर्षों का हवाला देते हुए कहा कि भारत को ड्रोन निर्माण के क्षेत्र में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी। उन्होंने जोर दिया कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन और ड्रोन रोधी तकनीकों की भूमिका निर्णायक होगी।

रक्षा मंत्री ‘राष्ट्रीय रक्षा उद्योग सम्मेलन’ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और इसमें उन्नत तकनीकों का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान-इजराइल संघर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने ड्रोन तकनीक की उपयोगिता को स्पष्ट कर दिया है। ऐसे में भारत को रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए मिशन मोड में काम करना होगा।

उन्होंने कहा कि देश को केवल ड्रोन बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसके सभी महत्वपूर्ण घटकों—जैसे सॉफ्टवेयर, इंजन, बैटरी और अन्य तकनीकी हिस्सों—का निर्माण भी भारत में ही होना चाहिए।

सिंह ने स्वीकार किया कि यह लक्ष्य आसान नहीं है, क्योंकि वर्तमान में अधिकांश देश ड्रोन के अहम पुर्जों के लिए आयात पर निर्भर हैं, विशेषकर चीन जैसे देशों पर।

रक्षा मंत्री ने उभरती तकनीकों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, स्वचालन और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसी तकनीकें वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र को नया स्वरूप दे रही हैं। साथ ही ‘डिजिटल ट्विन’ और उन्नत सिमुलेशन टूल्स भविष्य के लिए नई संभावनाएं खोल रहे हैं।

सम्मेलन में देश की प्रमुख रक्षा निर्माण कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के शीर्ष अधिकारी भी शामिल हुए।

सिंह ने उद्योग जगत से आह्वान किया कि वे अपने उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार करें और आत्मनिर्भरता को केवल अंतिम उत्पाद तक सीमित न रखते हुए घटक स्तर तक सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि यह भारत की रक्षा तैयारी और रणनीतिक मजबूती के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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