युद्ध क्षेत्र से दूसरा एलपीजी टैंकर भारत पहुंचा, 22 जहाज अब भी फंसे

नई दिल्ली, 17 मार्च। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर आई है। युद्धग्रस्त होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकलकर भारतीय ध्वज वाला दूसरा एलपीजी टैंकर नंदा देवी मंगलवार तड़के गुजरात के कांडला बंदरगाह पहुंच गया।

इससे पहले सोमवार को पहला टैंकर शिवालिक मुंद्रा बंदरगाह पहुंच चुका था। दोनों जहाजों में कुल करीब 92,712 टन एलपीजी है, जो देश की एक दिन की रसोई गैस जरूरत के बराबर मानी जा रही है।

बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि दोनों जहाजों से एलपीजी उतारने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है।

अधिकारियों के अनुसार, ये दोनों टैंकर 13 मार्च को रवाना हुए थे और 14 मार्च को होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर लिया था। इनके साथ अब तक कुल चार भारतीय जहाज इस संवेदनशील क्षेत्र से सुरक्षित निकल चुके हैं।

हालांकि, अभी भी 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिन पर करीब 611 नाविक सवार हैं। इनमें एलपीजी, एलएनजी, कच्चे तेल, रसायन, कंटेनर और अन्य माल ढोने वाले जहाज शामिल हैं। पोत परिवहन महानिदेशालय और भारतीय एजेंसियां इन जहाजों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी और समन्वय कर रही हैं।

पूर्वी क्षेत्र में मौजूद कच्चे तेल का टैंकर जग लाडकी भी करीब 80,800 टन कच्चे तेल के साथ भारत पहुंचने वाला है, जबकि जग प्रकाश सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार कर तंजानिया की ओर बढ़ चुका है।

गौरतलब है कि फारस की खाड़ी को खुले समुद्र से जोड़ने वाला यह रणनीतिक जलमार्ग हालिया सैन्य तनाव के कारण प्रभावित हुआ है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका है।

इसी बीच केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दोनों टैंकरों के चालक दल से वीडियो कॉल के जरिए बात कर उनके साहस और जिम्मेदारी की सराहना की।

सरकार का कहना है कि बाकी जहाजों और नाविकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास जारी हैं, ताकि देश में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो।

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