गाजियाबाद, हरदोई और कन्नौज में ‘संवाद सेतु’ लागू, जनप्रतिनिधियों की कॉल पर 10 मिनट में जवाब अनिवार्य

लखनऊ, 25 फरवरी 2026। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच संवाद को अधिक पारदर्शी, त्वरित और जवाबदेह बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में गाजियाबाद, हरदोई और कन्नौज में ‘संवाद सेतु’ (जिला संपर्क एवं कमांड सेंटर) व्यवस्था लागू कर दी गई है। समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस व्यवस्था का शुभारंभ किया।

बैठक में एमएलसी अवनीश कुमार सिंह, तीनों जनपदों के जनप्रतिनिधि, हरदोई और कन्नौज के जिलाधिकारी, गाजियाबाद के मुख्य विकास अधिकारी, ब्लॉक प्रमुख तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारी शामिल रहे। इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि ‘संवाद सेतु’ के तहत जिला संपर्क एवं कमांड सेंटर की सभी तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कॉल मॉनिटरिंग प्रणाली सक्रिय कर दी गई है और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जनप्रतिनिधियों की कॉल 10 मिनट के भीतर रिसीव करें या कॉल बैक अवश्य करें।

राज्यमंत्री असीम अरुण ने कहा कि यह व्यवस्था सभी जनप्रतिनिधियों—चाहे वे पक्ष, विपक्ष या निर्दलीय हों—के लिए समान रूप से उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि सरकार का एक ही उद्देश्य है—जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था की प्रतिदिन समीक्षा की जाएगी, ताकि संवाद प्रक्रिया प्रभावी और परिणाममुखी बनी रहे।

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक जनपद में स्थापित जिला संपर्क एवं कमांड सेंटर जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच समन्वय का केंद्रीय माध्यम बनेगा। यदि किसी अधिकारी द्वारा निर्धारित समय में कॉल रिसीव या कॉल बैक नहीं किया जाता है, तो जनप्रतिनिधि सीधे कमांड सेंटर को सूचित कर सकेंगे। इसके बाद कमांड सेंटर संबंधित अधिकारी को तत्काल संपर्क स्थापित करने के निर्देश देगा और समस्या के समाधान की प्रक्रिया को मॉनिटर करेगा।

अधिकारियों के अनुसार यह व्यवस्था केवल कार्य दिवसों और कार्यालय समय में ही लागू होगी तथा सरकारी सीयूजी नंबरों के माध्यम से होने वाले संवाद पर ही प्रभावी रहेगी। इस प्रणाली का उद्देश्य अनावश्यक विलंब को समाप्त करना, प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान को बढ़ावा देना है।

सरकार का मानना है कि ‘संवाद सेतु’ व्यवस्था से प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों के बीच समन्वय मजबूत होगा। पायलट प्रोजेक्ट के सफल क्रियान्वयन के बाद इसे अन्य जनपदों में भी लागू करने की योजना है। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि इस पहल से शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली अधिक उत्तरदायी और जनोन्मुख बनेगी।

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