जनप्रतिनिधि–अधिकारी समन्वय के लिए ‘संवाद सेतु’ कमांड सेंटर की शुरुआत

समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण

लखनऊ, 18 फरवरी 2026 — जनसमस्याओं के त्वरित समाधान और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में “संवाद सेतु” नामक जिला संपर्क एवं कमांड सेंटर स्थापित किया जाएगा। इस पहल के तहत जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच संवाद को समयबद्ध, रिकॉर्ड-आधारित और पारदर्शी बनाया जाएगा। योजना का औपचारिक आरंभ 25 फरवरी से हरदोई, गाजियाबाद और कन्नौज में किया जाएगा।

असीम अरुण ने बताया कि यह व्यवस्था जनप्रतिनिधियों के फोन कॉल्स का समयबद्ध प्रत्युत्तर सुनिश्चित करने के लिए विकसित की गई है। हाल के दिनों में अधिकारियों द्वारा कॉल न उठाने की शिकायतें सामने आई थीं, जिस पर समाधान के रूप में कमांड सेंटर मॉडल तैयार किया गया। लखनऊ में आयोजित समीक्षा बैठक में संबंधित जिलाधिकारियों के साथ इस प्रणाली की कार्यप्रणाली तय की गई।

नई व्यवस्था के अनुसार, यदि कोई अधिकारी जनप्रतिनिधि की कॉल का 10 मिनट के भीतर उत्तर नहीं देता है, तो जनप्रतिनिधि कमांड सेंटर को सूचित कर सकेंगे। इसके बाद कमांड सेंटर संबंधित अधिकारी से तुरंत संपर्क कर कॉल बैक सुनिश्चित करेगा और प्रक्रिया पूर्ण होने तक समन्वय बनाए रखेगा। इस पूरी प्रक्रिया की डिजिटल रिकॉर्डिंग और निगरानी की जाएगी।

कमांड सेंटर में तीन प्रशिक्षित ऑपरेटर तैनात किए जाएंगे, जो रोटेशन और बैकअप प्रणाली के आधार पर कार्य करेंगे। एक समर्पित स्मार्टफोन और विशेष सॉफ्टवेयर के माध्यम से सभी कॉल्स और अधिकारियों के रिस्पॉन्स टाइम का डेटा सुरक्षित रखा जाएगा। इसके अलावा, राजपत्रित अधिकारियों की उपलब्धता—ड्यूटी, अवकाश या प्रशिक्षण—की रियल-टाइम जानकारी भी केंद्र के पास उपलब्ध रहेगी, जिससे जनप्रतिनिधियों को वैकल्पिक संपर्क तुरंत उपलब्ध कराया जा सके।

प्रशासन के अनुसार यह पहल जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ाने के साथ-साथ अधिकारियों के वर्क-लाइफ बैलेंस का भी ध्यान रखेगी। व्यवस्था केवल कार्य दिवसों और कार्यालय समय के दौरान लागू होगी तथा यह सुविधा केवल सरकारी आवंटित नंबरों पर मान्य होगी। बेहतर समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया देने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहन दिया जाएगा, जबकि लगातार लापरवाही पर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।

अधिकारियों का मानना है कि “संवाद सेतु” से प्रशासनिक पारदर्शिता मजबूत होगी और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से उठने वाली जनसमस्याओं का समाधान अधिक प्रभावी और समयबद्ध तरीके से संभव हो सकेगा। यह पहल प्रशासनिक तंत्र को अधिक उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *