संघ को सोशल मीडिया पर अपनी ‘सक्रियता’ बढ़ानी होगी : मोहन भागवत

नागपुर, 19 मार्च। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संगठन अपने बढ़ते कार्यक्षेत्र और लोगों की बढ़ती अपेक्षाओं को देखते हुए अब विकेंद्रीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ताकि स्वयंसेवकों को अधिक सशक्त बनाया जा सके।

नागपुर में मराठी अखबार तरुण भारत के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि संघ का कार्य काफी विस्तार ले चुका है, इसलिए अब छोटे-छोटे प्रशासनिक ढांचे बनाकर काम को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि अब संघ की संरचना में बदलाव करते हुए 46 प्रांतों के स्थान पर 86 संभाग बनाए जाएंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर कार्यों का संचालन अधिक कुशलता से हो सकेगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ की मूल कार्यशैली—मित्रता और स्वयं उदाहरण प्रस्तुत कर नेतृत्व करना—जैसी थी, वैसी ही बनी रहेगी।

भागवत ने कहा कि ‘जेन जेड’ (14 से 29 वर्ष की युवा पीढ़ी) ईमानदारी और राष्ट्र सेवा जैसे मूल्यों की ओर आकर्षित होती है और संघ की विचारधारा इन्हीं सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने बताया कि जहां शाखाएं लगाना संभव नहीं होता, वहां स्वयंसेवक गेटेड सोसाइटियों और बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले लोगों तक पहुंच बना रहे हैं।

सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संघ को अपने सकारात्मक कार्यों को प्रचारित करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रियता बढ़ानी होगी। उन्होंने कहा कि मीम्स और रील जैसे माध्यमों के जरिए भी संगठन अपनी पहुंच बढ़ा रहा है और भविष्य में इस दिशा में और प्रयास किए जाएंगे।

भागवत ने यह भी कहा कि संघ का विस्तार केवल प्रचार से नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के बीच आपसी स्नेह और कार्य के प्रभाव से होता है। उन्होंने कहा कि विरोधी विचारधाराओं के लोग भी अब संघ के कार्यों को स्वीकार करने लगे हैं।

अपने बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश किए जाने के सवाल पर उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि ऐसी बातों पर उन्हें हंसी आती है और यह दर्शाता है कि आलोचकों के पास अब कहने के लिए ज्यादा कुछ नहीं बचा है।

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